थर्ड जेंडरों के प्रति समाज अपनी सोच बदले और परिवार वाले अपनाएं.: थर्ड जेंडर के बचपन, युवावस्था और वृद्धावस्था की समस्याओं को मार्मिक तरीके से बताया, उन्होंने बताया कि किस तरह उन्हें बचपन से बुढ़ापे तक अपमान झेलना पड़ता है।- विद्या राजपूत

कांकेर
!9.12.2017

कांकेर के कम्यूनिटी हॉल में ‘तृतीय लिंग समुदाय पर आधारित कार्यशाला’ आयोजित की गई। कार्यशाला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमंत सराफ, डीआईजी पुलिस रतनलाल डांगी, पुलिस अधीक्षक कन्हैयालाल ध्रुव, थर्ड जेंडर वेलफेयर बोर्ड के मेंबर विद्या राजपूत समेत कई थर्ड जेंडर और पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

डीआईजी पुलिस रतनलाल डांगी ने कहा कि भारतीय समाज में थर्ड जेंडरों के साथ किया जाने वाला भेदभाव खत्म होना चाहिए। परिवार में बेटा-बेटी की तरह उन्हें भी समानता का अधिकार मिलना चाहिए। माता-पिता जितना प्यार अपने बच्चों से करते हैं, उतना ही प्यार थर्ड जेंडर से भी करें। आखिर वे भी उनके परिवार के ही सदस्य हैें।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार में यदि किसी बच्चे का हाथ, पैर, आंख, कान जैसे अंग-भंग हो जाता है तो भी माता-पिता उसे नहीं त्यागते और बच्चे की परवरिश करते हैं। जब किसी एब्नॉर्मल बच्चे को जिंदगीभर के लिए माता-पिता अपना लेते हैं तो परिवार में यदि थर्ड जेंडर पैदा हुआ है अथवा एक समय के बाद पता चलता है कि वह थर्ड जेंडर है तो उसके साथ भेदभाव क्यों किया जाता है? उन्हें भी लड़के-लड़कियों की तरह शिक्षा दिलवाएं और उनकी रुचि के अनुसार रोजगारमूलक प्रशिक्षण दिलाएं तो उसका जीवन स्तर भी ऊंचा उठ जाएगा।

समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास हो

पुलिस अधीक्षक कन्हैयालाल ध्रुव ने कहा कि समाज में समानता के अधिकार के प्रति जागरूकता लाने की आवश्यकता है। लड़के-लड़की की तरह थर्ड जेंडरों को भी हर क्षेत्र में बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। पालन-पोषण से लेकर शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय और समाज में सम्मान पाने का हक उनको भी है। समय के अनुसार उन्हें कंप्यूटर व आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण दिया जाए। हर स्कूल में काउंसलर हो, उनकी मानसिक स्थिति के अनुरूप उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। थर्ड जेंडरों में भी मानवीय भावनाएं होती हैं, उन्हें भी अपना रिश्तेदार, दोस्त समझकर सम्मान देना चाहिए।

थर्ड जेंडर वेलफेयर बोर्ड की मेंबर विद्या राजपूत ने तृतीय लिंग समुदाय के सामाजिक मुद्दों के प्रति ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने थर्ड जेंडर के बचपन, युवावस्था और वृद्धावस्था की समस्याओं को मार्मिक तरीके से बताया। प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाया गया कि किस तरह उन्हें बचपन से बुढ़ापे तक अपमान झेलना पड़ता है।

वहीं, जिला एवं सत्र न्यायधीश हेमंत सराफ ने संबोधित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों, तृतीय लिंग व्यक्ति संरक्षण विधेयक 2017, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के निर्देशों, छत्तीसगढ़ शासन के आदेशों के बारे में भी जानकारी दी।

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