जाति उन्मूलन आंदोलन का तीसरा राज्य सम्मेलन व संगोष्ठी सम्पन्न : समाजिक लोकतंत्र के बिना राजनीतिक लोकतंत्र संभव नही है-संजीव खुदशाह.

जाति उन्मूलन आंदोलन का तीसरा राज्य सम्मेलन व संगोष्ठी सम्पन्न : समाजिक लोकतंत्र के बिना राजनीतिक लोकतंत्र संभव नही है-संजीव खुदशाह.

रायपुर, 18 दिसंबर 2017।

जाति उन्मूलन आंदोलन का तृतीय राज्य सम्मेलन गुरूघासीदास नगर (वृंदावन हाॅल) सिविल लाईन रायपुर में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र में ’’जाति विहीन समाज की क्या पहचान होगी’’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्कार व समाजसेवी कपूर वासनिक ने की। विशिष्ट वक्ता के रूप में विष्णु बघेल अंजू मेश्राम, अखिलेश एडगर, डा. गोल्डी एम. जाॅर्ज, डिग्री प्रसाद चौहान, एडवोकेट शाहिद, इकबाल खान, कैलाश वनवासी एवं संजीव खुदशाह ने अपना वक्तव्य रखा। दूसरा सत्र प्रतिनिधि सत्र था जिसमें जाति उन्मूलन आंदोलन के कार्यक्रम, विधान, विभिन्न प्रस्तावों का प्रस्तुति करण एवं नई राज्य कमेटी का गठन किया गया। कार्यक्रम का संचालन व आभार क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (कसम) के अखिल भारतीय संयोजक व जाति उन्मूलन आंदोलन के सदस्य तुहिन ने किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध कविय़त्री शिवानी मोइत्रा ने ’सच्चाई की नीव पर’ कविता प्रस्तुत की।

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कपूर वासनिक ने कहा कि जाति व्यवस्था को तोड़ने के प्रयास बहुत पहले से विभिन्न समाज सुधारको कबीर, महात्मा ज्योतिबा फुले, पेरियार स्वामेी, गुरूघासीदास बाबा आदि महापुरुषों ने किया। इस हेतु बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने जाति उन्मूलन का समाज शास्त्रीय एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पथ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सभी सुधारवादी क्रांतिकारी आंदोलन ब्राह्म्णवादी व्यवस्था का शिकार हो गये। इसलिए हमें बच्चों को सभी धर्मों को पढ़ने देना चाहिए वह स्वंय तय कर लेंगे कि सही क्या है। नई पीढ़ी जाति धर्म से परे होकर संविधान के अनुसार चलेगी। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि सामाजिक व राजनैतिक परिस्थिति एैसी बन रही है और विज्ञान की तरफ व्यक्ति तेजी से बढ़ रहा है। जिससे एैसा प्रतीत होता है कि 25वीं सदी तक जाति पूरी तरह समाप्त हो जायेगी। लोग पूछेंगे कि जाति नाम कि भी कोई चीज पहले हुआ करती थी क्या। उन्होंने जाति उन्मूलन आंदोलन के द्वारा जाति विहीन समाज बनाने हेतु किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।

जाति उन्मूलन आंदोलन के अखिल भारतीय कार्यकारी संयोजक संजीव ने कहा कि जाति व्यवस्था भारत में एक गंभीर बीमारी की तरह है, लेकिन भारत का एक बलशाली वर्ग जाति को कोई समस्या नहीं मानता है। या ये कहें जान बूझकर समस्या मानने से इनकार करता है, इसके पीछे उसके वर्गीय हित छिपे हैं, इस कार्य में छद्म प्रगतिशील लोग भी लगे हैं। जाति को चिन्हित करने वाली पहचान जैसे वस्त्र, अंगविच्छेदन ,पगड़ी, मुंडन, चुटैया, तथाकथित शुद्ध धागा जैसे- जनेउ, कलवा, ताबीज, विशिष्ट प्रकार की टोपी पर किसी जाति या सम्प्रदाय विशेष का एकाधिकार या बाध्यता नहीं होना चाहिए। राजनैतिक लोकतंत्र के लिए हम लड़ते है, हम सामाजिक लोकतंत्र नहीं बनाना चाहते क्योंकि हमारे दिल में चोर है।हमें बहुत सारी सुविधाएँ छोड़नी होगीं। वंचितो को देनी होगी। सामाजिक लोकतंत्र के बिना राजनैतिक लोकतंत्र स्थाई नहीं हो सकता। इसलिए लोकतंत्र को जीवित रखने के ेिलए सभी क्षेत्रों में सामाजिक लोकतंत्र लाना होगा।

सम्मेलन के द्वितीय सत्र में जाति उन्मूलन आंदोलन की नई राज्य कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। जिसमें श्री संजीव (रायपुर) को राज्य संयोजक एवं सदस्य के तौर पर श्रीमती अंजू मेश्राम (रायपुर), श्री तेजराम विद्रोही(गरियाबंद), श्रीमती रेखा गोंडाने(रायपुर), डाॅ. आर.के. सुखदेवे(रायपुर), श्री विष्णु बघेल (रायपुर), श्री राजू गनवीर (रायपुर), श्री रतन गोंडाने(रायपुर),श्रीमती चंद्रिका (जांजगीर-चांपा), श्री तुहिन(रायपुर), श्री रवि बौद्ध(रायपुर), श्री विक्रम त्यागी (रायपुर), श्री गोल्डी एम.जार्ज(रायपुर), श्रीमती हेमा भारती(अभनपुर), श्री दिनेश सतनाम (रायपुर), श्री संतोष लहरे(जांजगीर-चांपा), श्री डिग्र्री प्रसाद चैहान (रायगढ़), श्री शुभ्रांशु हरपाल (बस्तर), श्री राजू शेन्द्रे(रायपुर), श्री शाहिद इकबाल खान(रायपुर), श्री कपूर वासनिक(बिलासपुर),श्री अखिलेश एडगर(रायपुर),एडवोकेट जन्मेेजय सोना(रायपुर),श्री रविन्द्र कुमार (रायपुर), एडवोकेट शाकिर कुरैशी(रायपुर),श्री सुरेन्द्र कोल्हेकर(रायपुर),फादर जोशी(रायपुर) एवं श्री भानुप्रताप बाघमार(भिलाई) को शामिल किया गया।

सम्मेलन में बिहार के बथानीटोला, शंकरबिगहा में दलित किसानों के जनसंहार के दोषियों का उच्च अदालत द्वारा दोषमुक्त किया जाने के खिलाफ, रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या के लिए जिम्मेदार मंत्रियों, कुलपति समेत उच्च अधिकारियों की न्यायिक जांच आयोग द्वारा दोषमुक्त करार देने के खिलाफ, शिक्षा में भगवाकरण व निजीकरण के खिलाफ, दलितों के लिए भूमि व वैकल्पिक रोजगार के समर्थन में, पूरे देश में दलितों, आदि वासियों, महिलाओं, अल्पसंख्यको व मेहनतकशों पर बढ़ते दमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए गए।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में मेहनतकश, धर्मनिरपेक्ष, देशभक्त जनता एवं प्रगतिशील संगठनों के बुद्धिजीविगण व छात्र-छात्राएं उपस्थित थी।
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