कोबाड गांधी को सरकार माओवादी विचारक मानती है

मैनें उनके कुछ लेख पढ़े हैं

वे बहुत धारदार लिखते हैं

कोबाड अमीर घर में पैदा हुए,

दून स्कूल और फिर लंदन में पढ़ाई करी, चार्टड एकाउन्टैन्ट बने

लेकिन फिर ऐशो आराम की ज़िन्दगी छोड़कर गरीबों और आदिवासियों के लिये पूरा जीवन बिताया

कोबाड गांधी को नौ साल पहले दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था

अब कोबाड की उम्र 71 साल है और वे बीमार हैं

दो दिन पहले उन्हें हैदराबाद कोर्ट ने ज़मानत पर रिहा किया

वे मुंबई अपने घर जा ही रहे थे

कल रात झारखण्ड पुलिस ने कोबाड को फिर से उठा लिया

कोर्ट ने कोबाड को फिर से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया

सरकार की यह हरकत गैरकानूनी है

क्या झारखण्ड की पुलिस को नौ साल तक याद नहीं आया कि कोबाड गांधी के खिलाफ कोई मुकदमा है ?

कोर्ट द्वारा कोबाड को फिर से जेल में डाल देने का फैसला कोर्ट का राजनीति से प्रभावित होने का मामला है

71 साल के बूढ़े बीमार कोबाड से सरकार को इतना डर क्यों है

असल में कोबाड का लिखना ही सरकार को डराता है

कोबाड द्वारा अर्थव्यवस्था, कारपोरेट लूट, आदिवासियों के आन्दोलन पर लिखने की वजह से सरकार को घबराहट होती है

अमीरों की तरफदारी, गरीबों की लूट, कानून की धज्जियां उड़ाना ही आज के राज का मुख्य धन्धा है

ये दौर भी बीतेगा, ये अन्धेरा हमेशा नहीं रहेगा

संघर्ष की राह कभी सूनी नही होगी

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हिमांशु कुमार

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प्रेस को जारी एक बयान में घांडी ने कहा कि ये सरकार द्वारा उन्हें प्रताड़ित करने और पुलिस के तरीकों से उनकी हत्या करने का प्रयास है। साथ ही उन्होंने इस बात को भी चिन्हित किया है कि उनकी उम्र 71 वर्ष हो गयी है और डाक्टरों ने उन्हें एक महीने आराम करने की सलाह दी थी। उन्होंने अपोलो अस्पताल में अपना पूरा मेडिकल चेकअप कराया था। उन्होंने कहा कि अगर उनके साथ कोई भी अनहोनी होती है तो उसके लिए सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार होगी।
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