8 साल में कोई चार्जशीट नहीं : कल रिहा आज फिर गिरफ्तार किया कोबाड घांडी को : शर्मनाक

16.12.2017
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After being acquitted in all cases and spending eight years and three months in jail, when I, Kobad Ghandy was finally released from jail, I was re-arrested by the Jharkhand Police just three days after release. On Dec 16, 2017, I was attending the Achempet Court (near Hyderabad), the Jharkhand, accompanied by the APSIB (Andhra Pradesh State Intelligence Bureau) arrested me and took me by flight to Ranchi.

This FIR has been pending since 2010 and even though I and the Cherlapalli jail authorities wrote to the JMFC Bokaro/Tenughat twice for production there was no response. The first letter was written more than one year back on November 2, 2016. And when there was no response to this a reminder was sent by me and the jail authorities on March 9, 2017. Still there was no response.

Though I am 71 years and in serious health conditions. Immediately after release I had a check-up at the Apollo Hospital, Hyderabad, which recommended at least one month’s complete rest.

It is clear the police methods are being used to kill legally, given I am 71 years old and in very poor health. Since seven years they did not bother about this case, but in order to keep me in jail as an under trial indefinitely, they arrested me immediately on release.

In the case they have taken me, most have been acquitted and the rest are on bail. Yet the harassment.

If anything serious happens to my health in jail with this arrest, I will hold the government responsible. Given that I have been acquitted in all cases, that most have been acquitted in this case, and my age and health condition, demand my immediate release.

Kobad Ghandy

Dec 16, 2017

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8 साल 2 महीने जेल में रहने के बाद रिहा हुए माओवादी बुद्धिजीवी और क्रांतिकारी राजनीतिक कार्यकर्ता कॉमरेड कोबाड घाण्डी को आज फिर झारखंड पुलिस ने एक फ़र्ज़ी मामले में गिरफ्तार कर लिया।सवाल यह है कि यदि उन पर कोई और मामला था भी तो 8 साल 2 महीने के इस लंबे अंतराल में उन पर मुकदमा क्यों नहीं चलाया गया?ये सरासर अन्याय है और असंवैधानिक है।

“यदि कोई सरकार अपने ही बनाये गए नियमों और कानूनों को मानने से इन्कार कर दे तब समझिये की शांति भंग की जा चुकी है।”- चे ग्वेरा

राजकीय दमन मुर्दाबाद!
ब्राह्मणवादी हिन्दू फासीवाद को ध्वस्त करो!!
कॉमरेड कोबाड को बिनाशर्त रिहा करो!!!

साथी Ritesh Vidyarthi के वाल से साभार …

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कल ही आठ साल जेल में रहने पर कोबाड घांडी ने जतायी थी खुशी, लेकिन कहा- आधी है अभी आजादी
विशेष , ,

शुक्रवार , 15-12-2017

जनचौक डेस्क

नई दिल्ली। जेल से रिहा हुए माओवादी विचारक कोबाड घांडी ने 8 से ज्यादा सालों तक जेल में रखे जाने के बाद भी पुलिस द्वारा अपने खिलाफ चार्जशीट न दायर किए जाने पर अचरज जाहिर किया है। घांडी विशाखापटनम की जेल से मंगलवार को जमानत पर रिहा हुए हैं। उन्होंने कहा कि रिहाई से वो निश्चित तौर पर खुश हैं लेकिन उनके लिए ये अभी केवल आधी आजादी है।

रिहा होने के बाद इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि “मैं सचमुच में इस बात को लेकर चिंतित हूं कि इतने सालों तक जेल में रखे जाने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई चार्जशीट क्यों नहीं दायर की गयी।” उनका कहना था कि “उनके खिलाफ 10 से 15 साल पुराने तकरीबन 7 मामले हैं लेकिन पुलिस ने किसी में भी अभी तक चार्जशीट नहीं दायर की है। इसलिए मुझे लगता है कि वो एकाएक इन सारे मामलों को जिंदा कर देंगे। इसके अलावा गुजरात का एक मामला है (जिसमें पुलिस ने नक्सल गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में तुषार भट्टाचार्य को उठा लिया था और उसमें भी घांडी का नाम आया था।)। इस उम्र में ये सब तनाव का एक कारण बना हुआ है।” हालांकि रिहा होने पर उन्होंने खुशी जाहिर की। लेकिन फिर भी इसे आधी आजादी करार दिया।

71 वर्षीय घांडी को पहली बार दिल्ली से सितंबर 2009 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर प्रतिबिंत संगठन सीपीआई (माओवादी) से रिश्ता रखने का आरोप था। उनकी ये गिरफ्तारी यूएपीए के तहत हुई थी। हालांकि ये मामला पिछले साल खत्म हो गया था। लेकिन उनके खिलाफ कई दूसरे मामले थे जिसके चलते उन्हें 8 साल तक देश की विभिन्न जेलों में रहना पड़ा। इस बीच वो दिल्ली के तिहाड़ और हैदराबाद के चरलापल्ली जेल में भी रहे।

अपने शहर मुंबई जाने से पहले घांडी को दो और मामलों में पेश होना है। घांडी का बचपन मुंबई में ही बीता है। यहां उनकी बहन माहरुख रहती हैं। शुरुआती 21 साल यहां बिताने के बाद घांडी चार्टर्ड एकाउंटेंट की पढ़ाई करने के लिए लंदन चले गए थे। और फिर वहां से 1970 के दशक में एक बिल्कुल बदले हुए इंसान के तौर पर लौटे थे। ऐसा इंसान जिसमें वामपंथी आदर्शवाद कूट-कूट कर भर गया था। जिसने उस समय पूरे लंदन को अपनी गिरफ्त में ले लिया था।
पारसी परिवार में जन्मे घांडी के माता-पिता नगरिस और आदि घांडी बेहद दौलतमंद थे। लंदन से लौटने के बाद घांडी आपातकाल के बाद चलने वाले मानवाधिकार आंदोलनों के हिस्से बन गए। और फिर उन्होंने 1978 में ‘कमेटी फॉर दि प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रैटिक राइट्स’ का गठन किया। और फिर यहीं मुंबई में उनकी अपनी भावी पत्नी अनुराधा शानबाग से मुलाकात हुई। जो उस समय एलफिंस्टन कालेज में एमफिल की पढ़ाई कर रही थीं। 2008 में जब दोनों लोग भूमिगत थे उसी समय मलेरिया से अनुराधा शानबाग की मौत हो गयी। उसके एक साल बाद घांडी गिरफ्तार हो गए।

कोबाड घांडी जेल से रिहा होने के बाद।

जेल से रिहाई पर घांडी ने कहा कि “इतने सालों बाद बाहर आना निश्चित तौर पर अच्छा है। मैं बुरी तरीके से पारसी पकवान को मिस कर रहा हूं। बहुत सालों से मैंने अपने पसंदीदा खाने नहीं खाए।”

उन्होंने कहा कि वो मुंबई जाने के लिए बेताब हैं और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते हैं। वहां उनकी बहन और उनके साले उनका इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना था कि उन लोगों ने उनकी सास को रिहाई के बारे में नहीं बताया था लेकिन उन्होंने कहीं पेपर में पढ़ लिया। इसलिए जब वो वहां जाएंगे तो उन लोगों के लिए किसी अचरज से कम नहीं होगा।

उनका कहना था कि “इतने सालों बाद बाहर आने के बाद कई चीजें बदल गयी हैं। टेक्नालॉजी पूरी तरह से बदल गयी है। स्मार्टफोन का कैसे इस्तेमाल किया जाता है इसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता है।” घांडी के सीने में आजकल कुछ दर्द रहता है। अपने स्वास्थ्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि “ तकरीबन 8 साल बाद जेल से बाहर आने पर अच्छा महसूस होता है। मैं उम्मीद करता हूं कि मेरा स्वास्थ्य बेहतर होगा। जमानत के लिए अर्जी डालने के पीछे एक प्रमुख कारण विशेषज्ञ डाक्टरों को दिखाना भी था।”
उन्होंने कहा कि पुराने मित्रों से मिलना अच्छा लगा। खासकर वरवर राव से। उनके साथ कुछ पुरानी यादें ताजा की गयीं। उन लोगों ने मानवाधिकार आंदोलन के दौर की बातें की। दशकों पहले जो कुछ चीजें हुई थीं उनके बारे में उन्हें कुछ याद नहीं है। भविष्य की योजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि “मैंने अभी भविष्य के बारे में कुछ नहीं सोचा है। अभी नहीं जानता कि मैं क्या करूंगा। अभी तत्काल मेरी प्राथमिकता मेरा परिवार है। साथ ही मुंबई में अच्छी चिकित्सा सेवा लेना है।”
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