मानवाधिकार ही नहीं भारत की सभ्यता को खतरा ,धर्मनिरपेक्षता ,लोकतंत्र ,समाजवाद और मूल अधिकारों पर फासीवादी हमले के खिलाफ खडे नही हुये तो फिर कोई मौका नहीँ मिलेगा . पीयूसीएल छत्तीसगढ़ के कन्नाबीरन स्मृति व्याख्यान और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित अधिवक्ताओं को सम्मान में आये वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की और संघर्ष के लिए आव्हान किया .

मानवाधिकार ही नहीं भारत की सभ्यता को खतरा ,धर्मनिरपेक्षता ,लोकतंत्र ,समाजवाद और मूल अधिकारों पर फासीवादी हमले के खिलाफ खडे नही हुये तो फिर कोई मौका नहीँ मिलेगा . पीयूसीएल छत्तीसगढ़ के कन्नाबीरन स्मृति व्याख्यान और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित अधिवक्ताओं को सम्मान में आये वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की और संघर्ष के लिए आव्हान किया .


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बिलासपुर / 13,12,2017

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https://photos.app.goo.gl/OKS69DlBnPixdJWF2

कृपया उपरोक्त लिंक खोल कर देख लें ,इसमे 10 दिसम्बर 2017 को पीयूसीएल छत्तीसगढ़ द्वारा केजी कन्नाबीरन स्मृति व्याख्यान और अवार्ड वितरण के समस्त फोटो ग्राफ है .

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पीयूसीएल छत्तीसगढ़.द्वारा आयोजित के जी कन्नबीरन स्मृति व्याख्यान को सम्बोधित करते हुये वसन्त कन्नाबीरन ने कहा कि यह समारोह मेरे पति को स्मरण करते हुये मनाया जा रहा है ,उनके साथ मेने जीवन के 30 साल गुजारे है ,उन्होंने हमेशा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिये काम किया , नक्सली और आतंकवाद के नाम पर निर्दोष मानवाधिकार कार्यकर्ता को प्रताड़ना के खिलाफ कार्य करते रहे .
केजी कन्नाबीरन अवार्ड समारोह में पहुचे सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि पूरी न्याय व्यवस्था और दूसरे संस्थाओ में एक ही विचार धारा के लोगों को भरा जा रहा है जिससे न सिर्फ मानव अधिकार हनन.हो.रहा है बल्कि भारत की सभ्यता पर भारी खतरा पैदा हो गया है . चुनाव आयोग से लेकर मीडिया तक अब कमोवेश संघ के हाथ मे है जो भारत की परंपरा और सम्विधान की मूल भावना धर्म निरपेक्षता ,समाजवाद और बराबरी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है .


केजी कन्नाबीरन व्याख्यान माला में बिलासपुर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने अपने संबोधन में मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रफेल विमान घोटाले में शामिल होने के आरोप लगाए और कहा कि सरकार ने न्यायपालिका को अपने प्रभाव में लेने की कोशिशें की हैं। मीडिया को अपने चहेते व्यापारी मित्रों के जरिए खरीद लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन विमानों की खरीदी फ्रांस से कांग्रेस शासन काल में करीब 700 करोड़ रुपए में तय की गई थी, उसे मोदी सरकार ने 16 सौ करौड रुपए में खरीदने का सौदा किया और 58 हजार करोड़ रुपए की डील अंबानी की एक पुरानी कंपनी के जरिए तय की, इससे कंपनी को 28 हजार करोड़ का कमीशन दिया।

केंद्र सरकार के आर्थिक प्रतिबंधों पर भी प्रशांत भूषण ने आरोप लगाए कि सरकार ने लोगों के लेने देन पर तो कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए लेकिन राजनीतिक पार्टियों के चंदे लेने के सिस्टम को बेहद कमजोर कर दिया। यहां तक की विदेशी कंपनियों से चंदा लेने को ज्यादा आसान कर दिया और यह छूट भी दे दी कि निजी कंपनी राजनीतिक दलों को बिना नाम उजागर किए, बांड के जरिए पैसे दे सकती है। केंद्र सरकार पर कुछ दागी अफसरों को सीबीआई समेत कई प्रमुख पदों पर नियुक्ति के आऱोप भी उन्होंने लगाए।

इसके बाद मीडिया से बात करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि मानव अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए जनता को आगे आना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकास का अब नहीं चला तो वे मंदिर मस्जिद के मुद्दे पर उतर आए हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच नूरा कुश्ती चलने की बात कही वे मानते हैं कि दोनों ही सरकारें लोक पाल बिल पर अपनी सहमति नहीं दे रही है।

देश के प्रमुख समाजवादी चिंतक रविनायर ने रोहिग्या शरणार्थियों के खिलाफ भारत सरकार की नीति पर कहा की भारत ने हमेशा शरणार्थियों को सम्मान से लिया है यही सभ्यता के तकाज़ा भी है , बंगला देश से एक करोड़ शरणार्थी भारत आये उनके लिये पूरे भारत के लोगों ने पांच पैसा टेक्स देकर भी उमकी व्यवस्था की ,इनमे से 70 लाख वापस चले गए और 30 लाख आज भी भारत मैं रहते हैं ,जिनमें अधिकतर हिन्दू ही हैं , दलाईलामा से लेकर शक.,हूण, पारसी , आर्य ऐसी विभिन्न समूहों के भारत ने शरण दी है यह मानवता और भारतीय सँस्कृति ही है ,मोदी सरकार सिर्फ इसलिये रोहिग्या के खिलाफ खडी है क्यो की वे मुस्लिम है यह सोच अंतरराष्ट्रीय ,भारतीय और मानवीय सोच के भी खिलाफ हैं ।

आधार कार्ड को गुलामी और अंतरराष्ट्रीय षडयंत्र बताते हुए पटना से आये और आधार के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में याचिका कर्ता गोपाल कृष्ण ने कहा कि यह भारतीयों के खिलाफ सम्विधान में दिये गए निजिता के हक़ के विरोध में है .
पीयूसीएल के राष्ट्रीय सचिव बी सुरेश ने कहा की छतीसगढ मैं इतनी विपरीत परिस्थितियों में यहाँ जो अधिवक्ता न्याय औऱ मानवाधिकार के लिये संघर्ष कर रहे हैं वह बडा काम हैं. उन्होंने पीयूसीएल छत्तीसगढ़ को लगातार लडाई के लिये बधाई दी .

रेला कलेक्टिव के कलाकारों ने गीत और नाटक प्रस्तुत किये ,दल्ली राजहरा से आये जन मोर्चा के साथियों ने भी जनगीत प्रस्तुत किये.

छत्तीसगढ़ के 13अधिवक्ताओं को कन्नाबीरन अवार्ड से सम्मानित किया गया जो सामाजिक न्याय और मानव अधिकार के कार्य कर रहे हैं ,जिनमें अर्जुन सिंह नाग (दन्तेवाड़ा) सोनसिंह झाली(जगदलपुर ) मोहम्मद अशरफ(दुर्ग ) अमरनाथ पांडेय (सरगुजा ) क्षितिज दुबे (सुकमा ) न्यायधीश प्रभाकर ग्वाल (महासमुंद,)एस सी वर्मा ,रजनी सोरेन ,निरुपमा शैल बाजपेई, किशोर नारायण ( बिलासपुर ), गायत्री सुमन ( मस्तूरी ), सतेंद्र चौबे ( सरगुजा ), शोभा राम गिलहरे ( मस्तूरी ), को सम्विधान की प्रति और आवर्ड वसन्ता कन्नवीरन ,प्रशान्त भूषण ,बी सुरेश ने प्रदान किये.

सभा स्थल से प्रितिरोध मार्च (केंडिल मार्च ) में सभी प्रतिभागी देवकीनन्दन चौक पहुचे. यहां बडी आभ सभा आयोजित की गई थी इसमें देश के विभिन्न स्थानों से आये रेला कलेक्टिव के कलाकारों ने क्रांतकारी गीत, नाटक प्रस्तुत किये और प्रदेश के अलग अलग स्थानों से आये लोगो ने अपने विचारों को व्यक्त किया .जिनमे सुकुल प्रसाद नाग ( सुकमा ) डिग्री प्रसाद चौहान (रायगढ ,) गोल्डी जॉर्ज ( रायपुर ) सोन सिंह झाली( जगदलपुर ) जनकलाल ठाकुर ( ,दल्ली राजहरा )अखिलेश एडगर ( रायपुर )आनंद मिश्रा (बिलासपुर )अमर नाथ पांडेय (सरगुजा ) जूनिस तिर्की (जशपुर ) जेकब कुजूर (जशपुर ) कमल शुक्ल (कांकेर ) राकेश प्रताप सिंह परिहार (बिलासपुर ) निकिता ( बिलासपुर ) ,ईशा ,प्रियंका ने मंच का संचालन किया .

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K. G. Kannabiran
Memorial award

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Birth: November 9, 1929
Death: December 30, 2010
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K.G. Kannabiran was one of the most important voices in Indian civil liberty movement. He was influenced by the Left and progressive politics in his teenage and he was in favour of using law for the struggles of people from the early days of his practice whom he named “jurisprudence of rebellion” in the latter days. Thus his life as an activist of civil liberty has been a part of the struggle against state repression on public activities in Andhra Pradesh and elsewhere in India. In 1995, he became the National President of PUCL and gave a new voice to the struggles of public.
Chhattisgarh PUCL has established K.G. Kannabiran Memorial Award (for doing legal struggle in protection of Human Rights and for creative role in Development) to pursue tradition of K.G. Kannabiran’s adventurous and brave struggle against the conspiracy of combined forces of State, Corporate and Fascism to destruct Socialist, Secular and Democratic structure of Indian Constitution. First award ceremony in his honour will be held on the upcoming December 10, 2017 (Sunday) to mark Human Rights Day.

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List of rewarded Advocates who is committed to Social Justice

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1 Arjun Singh Nag

Arjun Singh Nag is the first Adivasi Lawyer practising in Bastar and the President of the District Minor Forest Produce Cooperative Union, Central Bastar. He is also the President of the Legal and Environmental Action Forum (LEAF). At present, with over 20 years of legal experience, he deals with issues relating to forests and adivasi people, especially encroachment and tribal rights. Nag ji is an active advocate of conservation, promoting forest protection from fire, the protection of sacred groves and, most importantly, the restoration of degraded forests by planting native plant species. He works on these issues with his colleagues at Legal and Environment Action Forum (LEAF), a forum which also provides health support and shelter for village people when they come to the town of Jagdalpur. Through LEAF, Nagji builds para-legal capacity amongst youngsters of the adivasi community.

2 Prabhakar Gwal

He qualified the Civil Judge Class-II Entrance Examination in 2006 with extreme hard work and was appointed as Civil Judge, Class-II, Durg. Later he was promoted as Special CBI Magistrate. He was known to be an honest Judge and gave some important judgments such as in the Bhadora Land Scam Case and PMT Leak Case. He bravely recommended registration of FIR against then SP of Durg in PMT Leak case for which he was threatened by a sitting BJP MLA who also was an ex policeman and subordinate of the then SP Durg. He also complained about other Juicial officers in Chhattisgarh High Court to expose their corruption. During carrying out of his Judicial Duties, he made enquiries about warrants which did not mention father’s name, age and residence and were used by police to arrest innocent Adivasi people of Bastar. He gave orders of granting bail and acquittal to many innocent adivasis who were arrested by Police in fake cases of Naxalism without any proof. He also demanded appointment of one Gondi interpreter in court by which arrested Gondi speaking adivasis can be heard and Justice can be done after hearing all parties but Police didn’t like these revolutionary Judicial works of Prabhakar Gwal and SP, Sukma made his complaint to District Court. Prabhakar Gwal was terminated from his post for all these revolutionary steps and for following his duties with full honesty which is very painful.

3 Son Singh Jhali

Son Singh Jhali has been advocating in District and Sessions Court, Bastar for many years. He has worked as coordinator in Chhattisgarh Legal Aid Center Jagdalpur and he has also served as legal advisor of various organisations such as Alliance Defending Freedom India, National Church mission association and Chhattisgarh State Christian Alliance. He has been working since 2004 for SC, ST, OBC, Minorities and other oppressed people to protect and promote their fundamental rights by documentation of incidents of atrocities and violence, reporting incidents of atrocities and violence to media, filing complaints to local authorities, concerned departments and commissions, providing immediate legal support and counselling to victims, networking with like-minded civil society organizations, etc. He has been consistently representing Christian adivasis in Court despite the opposition of many right-wing organizations. He has won many cases of this kind. In one of such case, Tribal persons belonging to Hindu religion were forcefully recovering fund from Tribals belonging to Christian religion in the name of construction of temples and hindu worship ceremonies and were not giving BPL Ration by sitting in Public Ration Shop with forcing them to do hindu worship. The officers who came to investigate in village after making complaint of incident to Collector, Bastar were send away from village by the villagers and the victims including children and women were beaten by the villagers but the police registered the case against both the parties. Son Singh Jhali helped all victims in their acquittal. He helped many tribals in their acquittal who were arrested in fake cases and helped them in registration of FIR against right wing fundamentalist organizations who carried out the assault against tribals and Clerics of Church. He filed petition in Chhattisgarh High Court against order of some Gram Sabhas which restricted the following of any religion other than Hinduism and High Court declared all orders null and void.

4. Amarnath Pandey

Amarnath Pandey has been constantly representing Adivasis arrested in fake cases of Naxalism and families of killed persons in fake encounters. Police had filed many fake cases against him for his brave work. One among these types of cases is related with the woman whose name is Ledha in which because Amarnath Pandey helped in bringing atrocities committed by then SP, SRP kalluri against Ledha and his family before Court, Police forced Ledha to file complaint against Amarnath Pandey and his brother. Police didn’t stop here to prevent growing steps of Amarnath Pandey towards justice rather Police filed an another fake case against him under SC,ST POA Act but Chhattisgarh High Court granted interim bail to him and gave order to dismiss the case. Amarnath Pandey also brought Narayan Khairval fake encounter before Court.

5 Rajni Soren

Rajni Soren started her law career with senior human rights advocate, Colin Gonzalves. He has been working as an advocate in the Chhattisgarh High Court since 2012. He filed a PIL in the Chhattisgarh High Court, Bilaspur for the release of prisoners who are facing life sentence and has lived in prison for more than 14 years. As a result, more than 70 prisoners have been released today and the case of release of 200 other prisoners is pending in Court. In the case of death of a tribal girl, Madkam Hidme in a fake encounter in Gompad, Sukma, she appeared for her mother, Madkam Lakshmi in which resulted in the formation of a judicial inquiry commission and report has also been prepared. She has filled various public interest litigations and writ petitions related to the women’s maternity rights and other health Rights in the Chhattisgarh High Court, in which she has received important orders from the court for the welfare of women. She filed a Public Interest Litigation on behalf of 10 special Bega tribes and challenged the order related to the ban on sterilization of Bega tribe. As a result of the said PIL, the amendment has been done in that order. She had submitted a PIL in Chhattisgarh High Court to improve the terms and conditions of the constables of Chhattisgarh Police, in which the Honorable High Court has given important instructions to Government in favor of the constables.

6 Gayatri Suman Narang

Gayatri Suman Narang started her journey as a volunteer with various civil society organisations working on different rights based thematics in Chhattisgarh. She had also worked as a fellow with Dalit Foundation. She actively engaged in dalit rights movement through legal awareness programmes & advocacy on just and fair mechanisms for adequate response against atrocities on woman and dalits. She started representing oppressed section of Society in Courts after getting his degree of Law. She also became the first woman lawyer from Masturi block (Bilaspur). In 2012, she started working as a state coordinator with Kanooni Marg Darshan Kendra, a law clinic set up by the Centre for Social Justice. In 2013, she was involved in collating documents & conceptualizing the PIL for adequate implementation of PWDV Act, 2005 in the State of Chhattisgarh which has led to the appointment of protection officers, and medical & shelter facilities for survivors of domestic violence. In 2014-15, she represented victims before the judicial probe commission which was constituted to look into medical negligence that took place at a mass sterilisation camp ( for laparascopic tubectomies) at Takhatpur Block of Bilaspur district, Chhattisgarh. Since 2016, she has been working with family members of a dalit man killed during police custody and has been helping them make representations before the judicial probe commission constituted subsequently.

7 Kishore Narayan

Kishore Narayan started working as an advocate in Human Rights Law Network, Delhi since april 2009. Since then till now he has been working as an Advocate in Chhattisgarh High Court, Bilaspur. He has been constantly practicing on matters related to human rights in Chhattisgarh High Court. He played his important role in providing bail to journalist Prabhat Singh and Santosh Yadav in Chhattisgarh High Court and Supreme Court who was charged in a fake case by Chhattisgarh Government. He appeared for two advocates of Telangana and four social workers and helped them in getting bail. With his efforts, the notice of the Railway to break the house of more than 300 Dalit slum dwellers in Bapu Upnagar Bilaspur was suspended by the High Court. He also played his important role in terminating an FIR against Senior advocate Amarnath Pandey in Chhattisgarh High Court.

8 Satish Chand Verma

Satish Chandra Verma started his practice in Raipur and after a year he moved to High Court of Madhya Pradesh at Jabalpur and joined chamber of Senior advocate Mr. SC Datt. In 2000 after formation of Chhattisgarh he shifted to Bilaspur and practices in High Court of Chhattisgarh at Bilaspur. Satish Chandra Verma is a respected member of Bar and has taken up many cases of social cause and Human Rights in which Gagan Das Case is an important one. In this case, Court declared the act of Chhattisgarh Police of arresting some residents of Orrisa bad in eyes of law and has ordered SIT inquiry into the matter. Among many other PILs, he appeared in Gaurav Path case. He also appeared in Antagarh Election Bribery case.

9 Sobharam Gilhare

Shobharam Gilhare became involved in the field of Human Rights as a young journalist writing about atrocities against dalits, adivasis & woman. Subsequently, he started working with civil society organisations on the same issues. It was at one of these organisations that he also worked as a block coordinator on the rights of primitive tribes in Dhamtari. At the time he was the 2nd dalit person from Arang Block, Raipur to practice litigation. In 2011, he started working as a unit coordinator with Kanooni Marg Darshan Kendra, Raipur, Centre for Social Justice’s second law centre in Chhattisgarh. He has secured a large number of favourable orders under PWDV Act & section 125 of CrPC for aggrieved women. He has also facilitated claims of victims under SC/ST POA & has secured many convictions by assisting prosecution. He has conducted hundreds of legal awareness shivirs in Raipur & Baloda Bazaar which has led to identification of violations of human rights later taken up at appropriate forums. He has also developed KMK, Raipur centre into a platform for discourses where people especially from vulnerable groups strategize to achieve their aspirations with the help of legal advocacy. He is instrumental in creating a cadre of women & dalit paralegals, laywers with an objective of making the community sustainable in responding to the human rights violations.

10 Mohammad Arshad Khan

Mohammad Arshad Khan has been regularly practising for 17 years. He has appeared in almost all District and Session Courts of Chhattisgarh. When a Kashmiri Youth Tausif Ahmad Bhatt who was arrested by Police in fake sedition case for liking so called anti-National post on Facebook and no lawyer was coming to take his case because of fear from Police and government, that time he came in front with bravery and took case in his hand. He got success in getting bail for Tausif Ahmad Bhatt.

11 Nirupama Shail Bajpayi

Nirupama Shail Bajpayi started her practice in 1990 because she always wanted to do something meaningful against exploitation of poor and women. She is constantly supporting the exploited people against the atrocities committed by the famed people. She is making women of villages and towns and prisoners aware about their rights through legal literacy programs. Awareness programs are also being conducted by her to prevent superstitions

12 Kshitiz Dubey

Kshitiz Dubey is a resident of Dantewara and he has worked as public prosecutor for many years. He did his work with full transparency. He joined Human Rights Law Network in 2016 and has been constantly representing adivasis of Bastar who have been booked under false cases of Naxalism despite of growing repression of Police. He has appeared in many cases of illegal detention and assault of adivasis.

13 Satyendra Kumar Chaubey

Satyendra Kumar Chaubey has been practising since 1996 and he has appeared in many important cases in courts of Ambikapur, Surajpur, Balrampur, Sarguja and Baikanthpur. During this period, he appeared in approximately 300 cases in which persons were booked with false charges of Naxalism without any proof. He has won in all these cases. In 1998, he was appointed by villagers to appear for them who were arrested by Police in fake case of attacking Bargaon Police Station for which fake FIR was registered by Police against Satyendra Kumar Chaubey and hence he was arrested. He had to live in Jail for 3 months because of his passion to provide Justice to innocent villagers and presently his case is pending before NIA Court Bilaspur.

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के. जी . कन्नाबीरन
स्मृति सम्मान
ज?: नवम्बर 9, 1929
मृत्यु: दिसम्बर 30, 2010
के.जी. कन्नाबीरन भारत के नागररक स्वतंत्रता आंिोलन में सबसे महत्वपूर्ण आवाों ों में से एक थे | वह अपूनी दकशोरावस्था में ही वामपूंथ और प्रगदतशील राों नीदत से प्रभादवत थे और वकालत के प्रारंदभक दिनों से ही कानरन को ों नता के संघर्षो के दलए प्रयोग करने के पूक्षधर थे दों सको उन्ोंने बाि के दिनों में “तिद्रोह के न्मायशास्त्र” का नाम दिया | इस प्रकार उनका ों ीवन एक नागररक स्वतंत्रता कायण कताण के रूपू में आंध्र प्रिेश और भारत में अन्य ों गहों पूर ों नता की गदतदवदधयों पूर राज्य िमन के खिलाफ संघर्षण का एक दहस्सा रहा है | 1995 में वह पूी.यर.सी.एल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने और ों नता के संघर्षो को एक नयी आवाों िी |
छत्तीसगढ़ पूी.यर.सी.एल ने के.जी. कन्नाबीरन स्मृति पुरस्कार (मानव अदधकारों की रक्षा में कानरनी संघर्षण और दनमाण ् में रचनात्मक भरदमका हेतु ) की स्थापूना की है तादक के.ों ी कन्नाबीरन द्वारा भारत के संदवधान के समाों वािी-सेक्युलर-लोकतांदत्रक ढााँचे को िहाने की राज्य-कॉपूोरेट-फासीवाि की संयुक्त शखक्त की सादों श के खिलाफ उनके साहदसक और बहािुर संघर्षण की पूरम्परा को आगे बढ़ाया ों ा सके | उनके सम्मान में पूहला सम्मान समारोह आगामी 10 दिसम्बर, 2017 (रदववार) को मानव अदधकार दिवस के उपूलक्ष्म में आयोदों त दकया गया है.
सामातजक न्माय के तिए समतपिि सम्मातनि तकये जाने िािे अतििक्ताओं की सूची
अजुिन तसंह नाग
अों ुण न दसंह नाग बस्तर में वकालत करने वाले पूहले आदिवासी वकील हैं और दिखररक्ट माइनर फारेर प्रोड्यरस कोपूरेदटव यरदनयन, केंद्रीय बस्तर के अध्यक्ष हैं। वह लीगल एंि एनवायरनमेंट एक्शन फोरम (लीफ) के अध्यक्ष भी हैं | वह 26 से अदधक वर्षों के कानरनी अनुभव के साथ ों ंगलों और आदिवासी लोगों, दवशेर्षकर अदतक्रम् और ों नों ातीय अदधकारों से संबंदधत मुद्ों पूर कायण कर रहे हैं | नाग ों ी संरक्ष्, अदि से ों ंगल संरक्ष् को बढ़ावा िेने, पूदवत्र भरगभों की सुरक्षा और, सबसे महत्वपूर्ण , िेशी उद्यान प्रों ादतयों के रोपू् के द्वारा वनों की बहाली के सदक्रय अदधवक्ता हैं | वह इन मुद्ों पूर लीगल एंि एनवायरनमेंट एक्शन फोरम (लीफ) में अपूने सहयोदगयों के साथ कायण कर रहे हैं, ों ो गांव से ों गिलपूुर आने वाले लोगों के दलए स्वास्थ्य सहायता और आश्रय प्रिान करने वाला एक मंच भी है | लीफ के माध्यम से, नागों ी आदिवासी समुिाय के युवाओं में पूैरा-कानरनी क्षमता दवकदसत भी करते हैं |
प्रभाकर ग्वाि
प्रभाकर ग्वाल ने 2006 में अत्यंत पूररश्रम से दसदवल ों ों क्लास -2 प्रवेश पूरीक्षा उत्ती्ण की दों सके पूश्चात उन्ें िुगण में दसदवल ों ों क्लास -2 के रूपू में दनयुक्त दकया गया और आगे चलकर उन्ें दवशेर्ष सीबीआई िंिादधकारी के रूपू में भी पूिोन्नत दकया गया | वह एक ईमानिार न्यायाधीश के रूपू में ों ाने ों ाते थे और उन्ोंने कई महत्वपूर्ण मामलों में अपूने दन्ण य दिए हैं दों नमें मुख्य रूपू से भिोरा भरदम घोटाला और पूी.एम.टी लीक केस शादमल हैं | उन्ोंने पूी.एम.टी लीक केस में तत्कालीन S.P िुगण के खिलाफ ऐफ.आई.आर िों ण करने का साहसी दन्ण य दिया दों सके दलए उन्ें बीों ेपूी M.L.A द्वारा िराया-धमकाया भी गया | उन्ोंने न्यादयक अदधकाररयों के द्वारा दकये ों ाने वाले भ्रराचार को सामने लाने के दलए उनकी उच्च न्यालय में
दशकायत की | अपूनी न्यादयक सेवायें दनभाने के िौरान प्रभाकर ग्वाल ने उन वारंटों की ों ााँच की दों नमें आरोपूी व्यखक्तयों के दपूता का नाम, आयु और दनवास तक का उल्लेि नहीं होता था और पूुदलस उन वारंटों का प्रयोग दनिोर्ष आदिवादसयों को दगरफ्तार करने के दलए करती थी | उन्ोंने कई दनिोर्ष आदिवादसयों को ों मानत िेने और बरी करने के आिेश दिए दों नकों दबना दकसी सबरत के पूुदलस फों ी मामलों में फसाने का कृत्य करती थी और इसके साथ ही उन्ोंने एक गोंड़ी भार्षी अनुवािक को दनयुक्त करने की मांग भी की तादक दगरफ्तार गोंड़ी भार्षी व्यखक्तयों को सही से सुना ों ा सके और सभी पूक्षों को सुनकर न्याय प्रिान दकया ों ा सके पूर पूुदलस को प्रभाकर ग्वाल के ये न्यादयक कायण पूसंि नहीं आये और पूुदलस आधीक्षक, सुकमा ने उनकी दों ला न्यायाधीश से दशकायत कर िी | इन सभी क्राखिकारी क़िमों और अपूनी दों म्मेिाररयों को सच्चाई से दनभाने के दलए प्रभाकर ों ी को अपूने पूि से बिाण स्त कर दिया गया ों ो अत्यंतत ही िुििायी है |
सोन तसंह झािी
सोन दसंह झाली कई वर्षों से दों ला एवं सत्र न्यायालय, दों ला- बस्तर में वकालत कर रहे हैं | वह छत्तीसगढ़ लीगल ऐि सेंटर, ों गिलपूुर मे समन्वयक के रूपू में कायण भी कर चुके हैं और इसके साथ ही वह अलायन्स िीफेखडंग फ्रीिम इंदिया, नेशनल चचण दमशन एसोदसएशन, छत्तीसगढ़ रेट दक्रखस्चयन अलायन्स ों ैसे संगठनो के दवदधक पूरामशण क रह चुके हैं | वह 2004 से अत्याचार और दहंसा की घटनाओं का िस्तावेों ीकर्, मीदिया के दलए अत्याचार और दहंसा की घटनाओं को ररपूोटण करना, स्थानीय अदधकाररयों, संबंदधत दवभागों और आयोगों को दशकायत िों ण करना, नागररक समाों संगठनों के साथ नेटवदकिंग ों ैसे कायों के माध्यम से वंदचत वगों के मौदलक अदधकारों के दलए लड़ रहे हैं | वह कई िदक्ष्पूंथी संगठनों के दवरोध के बावों रि लगातार दनिरता से न्यायालय में इसाई अल्पसंख्यक आदिवादसयों का प्रदतदनदधत्व करते आ रहे हैं | उन्ें कई ऐसे मुकद्मों में सफलता प्राप्त हुई है दों नमें से एक मामले में वर्षण 2014 में दहन्िर धमण के मानने वाले आदिवासी लोग ईसाई धमण को मानने वाले आदिवादसयों से ों बरन कुछ दहन्िर धमण स्थलों के दनमाण ् और पूरों ा पूाठ के नाम पूर चंिा वसरली कर रहे थे और पूरों ा पूाठ करने का िवाब बनाते हुए सहकारी राशन िरकान में बैठकर उनको 2-3 माह से बी.पूी.एल राशन नहीं िे रहे थे | पूीदड़तों द्वारापूर कलेक्टर, बस्तर को दशकायत करने पूर ों ांच के दलए आये अदधकाररयों
को गाव वालों के द्वारा भगा दिया गया और पूीदड़तों को बच्चे, मदहलाओं सदहत गााँव में िोड़ा-िोड़ा कर पूीता गया पूर पूुदलस ने िोनों पूक्षों के दवरुद्ध मामला पूंों ीबद्ध कर दिया | सोन दसंह झाली ने अपूने कड़े प्रायोसों से न्यायालय में सभी पूीदड़त ईसाई धमण के आदिवादसयों को िोर्षमुक्त करा दलया | उन्ोंने ऐसे कई फों ी मामलों में फसाए गए ईसाई आदिवादसयों को िोर्षमुक्त करवाया और उन कट्टर िदक्ष्पूंथी संगठनो के खिलाफ मुकद्मा िों ण करवाया दों न्ोंने आदिवादसयों और उनके पूािररयों के साथ मारपूीट की घटनाओं को अंों ाम दिया था | उन्ोंने कई ग्राम सभाओं द्वारा पूाररत दकये गए प्रस्ताव दों समें गााँव वालों को दहन्िर धमण को छोड़कर दकसी अन्य धमण को मानने पूर प्रदतबंध लगाया गया था के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में पूीदटर्षन प्रस्तुत दकया और आगे चलकर न्यायालय द्वारा सभी प्रस्तावों को शरन्य घोदर्षत दकया गया |
सत्येन्द्र कुमार चौबे
सत्येन्द्र कुमार चौबे 1996 से वकालत करते आ रहे हैं और उन्ोंने अंदबकापूुर, सररों पूुर, बलरामपूुर, सरगुों ा, बैकंठपूुर ों ैसे दों लों में कई महत्वपूर्ण मामलों में पूैरवी की है | इस िौरान उन्ोंने ऐसे करीब 300 मामलों में पूैरवी की है दों समे लोंगो को फों ी नाक्सली प्रकर् में फसाया गया था | इन सभी मामलों में उन्ें ों ीत हादसल हुई है | उन्ें 1998 में बारगांव पूुदलस थाने, अंदबकापूुर पूर हमला करने के झरठे आरोपू में फसाए गए ग्रामी्ों द्वारा वकील के रूपू में दनयुक्त दकया गया दों सके दलए पूुदलस द्वारा उनके खिलाफ फों ी एफ.आई .आर िों ण की गयी और उन्ें दगरफ्तार कर दलया गया | सतेन्द्र कुमार चौबे को अपूनी दनिरता से दनिोर्ष गााँववालों को न्याय दिलवाने के दलए 3 महीने ों ेल में भी रहना पूड़ा और अभी उनका केस ऐन. आई. ए कोटण , दबलासपूुर के समक्ष चल रहा है |
अमरनाथ पाण्डेय
अमरनाथ पूाण्डेय, अत्यंत ही बहािुरी के साथ, न्यायालय में फों ी नक्सल मामलों में फसाए गये आदिवादसयों और फों ी मुधभेिों में मारे गए व्यखक्तयों के पूररवारों का प्रदतदनधत्व करते आ रहे हैं | उनके इसी दनिरतापूर्ण कायण के दलए पूुदलस ने उनके खिलाफ कई फों ी मुकद्मे िों ण दकये हैं |
उन्ीं में से एक मुकद्मा लेधा नामक मदहला से ों ुड़ा हुआ भी है दों समें क्यरंदक अमरनाथ ने तत्कालीन एसपूी एस आर पूी कल्लररी के द्वारा लेधा और उसके पूररवार पूर दकये ों ा रहे अत्याचार को न्यायालय के संज्ञान में लाने के दलए मिि की थी, पूुदलस ने लेधा के ऊपूर िवाब बनाकर अमरनाथ ओर उनके भाई के खिलाफ दशकायत िों ण करवा िी | पूुदलस अमरनाथ के न्याय के प्रदत बढ़ते किम को रोकने के दलए दसफण यहीं तक नहीं रुकी बखि 2007 में उनके खिलाफ SC,ST POA क़ानरन के तहत एक और फों ी मुकद्मा िों ण करा दिया पूर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उनको इस मामले में अदग्रम ों मानत िे िी और आगे चलकर मुकद्मा को दनरस्त करने का आिेश िे दिया | उन्ोंने नाराय् िैरवाल के फों ी मुठभेड़ में मारे ों ाने को सामने लाने का कायण भी दकया |
रजनी सोरेन
रों नी सोरेन ने अपूने दवदध व्यवसाय का प्रारंभ वररष्ठ मानवादधकार अदधवक्ता, कॉलीन गोन्ों ाल्वीस के साथ दकया | वह 2012 से आों तक छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अदधवक्ता के रूपू में कायण रत हैं | उन्ोंने छत्तीसगढ़ के दवदभन्न ों ेलों में दनरुद्ध आों ीवन सों ायाफ्ता बंिी दों न्ोंने 14 साल से अदधक सों ा काट ली है की ररहाई हेतु एक ों नदहत यादचका छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय दबलासपूुर में प्रस्तुत की दों सके फलस्वरूपू आों 70 से अदधक बंदियों को ररहाई दमली है एवं 200 बंदियों की ररहाही का मामला दवचाराधीन है | उन्ोंने गोमपूाड़, सुकमा दों ले की आदिवासी युवती मड़कम दहड़मे के फों ी मुठभेड़ में मृत्यु के प्रकर् में उनकी माता मड़कम ल?ी की और से पूैरवी की, दों सके फलस्वरूपू एक न्यादयक ों ांच आयोग का गठन दकया गया एवं प्रदतवेिन भी तैयार दकया गया है | उन्ोंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में मदहला मातृत्व अदधकार एवं स्वास्थ्य के अदधकार से संबंदधत ों नदहत यादचकाएं एवं ररट याचकाए प्रस्तुत की हैं दों नमें उन्ोंने न्यायालय से महत्वपूर्ण आिेश भी प्राप्त दकये हैं | उन्ोंने 10 बैगा दवशेर्ष ों नों ादतयों की तरफ से ों नदहत याचका प्रस्तुत की एवं बैगा ों नों ादत को नसबंिी के प्रदतबंध से संबदधत आिेश को चुनौती िी एवं उक्त ों नदहत यादचका के पूरर्ाम स्वरुपू प्रदतबंध आिेश में संसोधन दकया गया है | उन्ोंने छत्तीसगढ़ पूुदलस आरक्षकों की सेवा शतों एवं पूररखस्थदतयों में सुधार लाने के दलए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में ों नदहत यादचका प्रस्तुत की थी दों समें आरक्षकों के पूक्ष में माननीय उच्च न्यायालय ने शाशन को महत्वपूर्ण दनिेश दियें हैं |
तकशोर नारायण
दकशोर नाराय् ने अप्रैल 2009 से ह्यरमन राईट्स लॉ नेटवकण दिल्ली में अदधवक्ता के रूपू में कायण करना आरंभ दकया दों सके बाि से आों तक वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अदधवक्ता के रूपू में कायण रत है | उन्ोंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अदधवक्ता के रूपू में मानव अदधकार से संबंदधत मामलों पूर पूैरवी की | उन्ोंने छत्तीसगढ़ शाशन से फों ी रूपू में फसाए गए पूत्रकार प्रभात दसंह एवं संतोर्ष यािव को उच्च न्यायालय एवं सवोच्च न्यायालय में ों मानत दिलाने में अपूनी भरदमका दनभाई | उन्ोंने तेलंगाना के िो अदधवक्ता एवं चार सामादों क कायण कताण ओं को भी ों मानत दिलाने के दलए पूैरवी की | उनके प्रयास से बापूर उपूनगर दबलासपूुर में 300 से अदधक िदलत झुग्गी झोपूिी वालों के घर तोड़ने के रेलवे के नोदटस पूर हाई कोटण से स्थगन हो पूाया | दकशोर नाराय् वररष्ठ अदधवक्ता श्री अमरनाथ पूाण्डेय के खिलाफ िों ण एक फों ी एफ. आई. आर को भी हाई कोटण से रद् करने में अपूनी भरदमका दनभाई |
गायत्री सुमन नारंग
गायत्री सुमन नारंग ने अपूने सफर की शुरुआत छत्तीसगढ़ में दवदभन्न अदधकारों के आधार पूर काम करने वाले दवदभन्न नागररक समाों संगठनों के साथ एक स्वयंसेवक के रूपू में की। उन्ोंने िदलत फाउंिेशन के साथ में फेलो के रूपू में कायण भी दकया | वह लगातार कानरनी ों ागरूकता कायण क्रमों और वकालत के माध्यम से िदलत अदधकार आंिोलन में सदक्रय रही हैं | वह अपूनी दवदध की दिग्री प्राप्त करने के बाि लगातार न्यायालय में समाों के िबे-कुचले वंदचत वगण का प्रदतदनदधत्व करना शुरू कर दिया | वह इसी के साथ मस्तुरी ब्लाक (दबलासपूुर ) की प्रथम मदहला अदधवक्ता हैं | वह 2012 में सेंटर फॉर सोशल ों खरस के द्वारा स्थादपूत कानरनी मागण िशण न केंद्र में राज्य समन्वयक के रूपू में कायण भी कर चुकी हैं | उन्ोंने 2013 में ों नदहत यादचका के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में घरेलु दहंसा क़ानरन, 2005 को लाघु कराने में अहम् योगिान दिया दों ससे सुरक्षा अदधकाररयों की दनयुखक्त हुई और घरेलर दहंसा से पूीदड़त मदहलाओं के दलए दचदकत्सा और शर् की सुदवधा हुई | उन्ोंने 2014-15 में न्यादयक ों ांच आयोग के समक्ष दबलासपूुर के तितपूुर ब्लाक में लगे नसबंिी दशदवर में हुई दचकत्सा लापूरवाही से पूीदड़त व्यखक्तयों की पूैरवी भी की | वह 2016 से पूुदलस करिी में मारे गए एक िदलत व्यखक्त के
पूररवार के साथ काम कर रही हैं और घटना के तुरंत बाि बने न्यादयक ों ांच आयोग के समक्ष उनकी पूेशी में मिि कर रही हैं .
श्री. शोभाराम
शोभाराम ने मादनवादधकार के क्षेत्र में अपूने सफर की शरुआत िदलत,आदिवादसयों और मदहलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ दलिते हुए एक युवा पूत्रकार के रूपू में की | उन्ोंने ब्लॉक समन्वयक के रूपू में एक नागररक समाों संगठन के साथ आदिम ों नों ादत के अदधकारों पूर भी कायण दकया है | वह आरंग ब्लाक, रायपूुर से िुसरे ऐसे व्यखक्त हैं दों न्ोंने वकालत का पूेशा अपूनाया है | उन्ोंने 2011 में सेंटर फॉर सोशल ों खरस के द्वारा स्थादपूत कानरनी मागण िशण न केंद्र में यरदनट समन्वयक के रूपू में कायण करना आरम्भ दकया | उन्ोंने घरेलु दहंसा क़ानरन और CrPC की धारा 125 के अंतगण त पूीदड़त मदहलाओं के दलए न्यायालय से अनुकरल आिेश पूाररत कराने में अहम् भरदमका दनभाई | उन्ोंने SC/ST POA काननों के अंतगण त कई पूीदड़तों को न्याय दिलाने में मिि की | उन्ोंने रायपूुर और बलोिा बाों ार में कई दवदधक ों ागरूकता दशदवरों का संचालन दकया, दों सके चलते उपूयुक्त मंचों पूर मानवादधकारों के उल्लंघन की पूहचान हुई है। उन्ोंने के.एम.के, रायपूुर केंद्र को एक ऐसे मंच के रूपू में दवकदसत दकया है, ों हां दवशेर्ष रूपू से वंदचत समाों के लोग कानरनी वकालत की मिि से उनकी आकांक्षाओं को प्राप्त करने के दलए र्नीदतक बनाते हैं। उन्ोंने मानव अदधकारों के उल्लंघन के ों वाब में वंदचत समुिाय को स्थायी बनाने के उद्ेश्म से मदहलाओं और िदलत पूैरारालीगलों का एक कैिर बनाने में एक महत्वपूर्ण भरदमका दनभाई है।
मोहम्मद अरशद खान
मोहम्मि अरशि िान 17 वर्षों से लगातार वकालत कर रहे हैं | उन्ोंने कई महत्वपूर्ण मामलों में छत्तीसगढ़ की तक़रीबन सभी दों ला एवं सत्र न्यायालयों में पूैरवी की है | ों ब क?ीरी युवा तौसीफ अहमि भट्ट, ों ो फेसबुक पूर भारत दवरोधी सामग्री को लाइक करने के दलए राों द्रोह के झरटे मुकद्में में दगरफ्तारी का सामना कर रहे हैं और उनकी पूैरवी करने के दलए भय के कार्
कोई भी वकील आगे नहीं आ रहा था उस समय अरशि िान ने दनिरता से मामले में पूैरवी की और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से तौसीफ को ों मानत दिलवाने का कायण दकया |
तनरुपमा शैि बाजपेयी
दनरुपूमा शैल बाों पूेयी ने 1990 में अपूनी वकालत शुरू की क्यरंदक वह हमेशा से गरीबों और मदहलाओं के दवरुद्ध होने वाले अत्याचार और भ्रष्ट्ाचार के खिलाफ कुछ साथण क करना चाहते थे | वह लगातार रसरििारों द्वारा दकये ों ा रहे अत्याचार के दवरुद्ध शोदर्षत का साथ िेते आ रहे हैं | वह दवदधक साक्षरता के कायण क्रम में गााँव कस्ों की मदहलाओं को ों ागरूक करने का कायण कर रहे हैं और साथ ही ों ेल में दनरुद्ध लोगों के अदधकारों से अवगत कराने से लेकर उनके बीच कानरनी साक्षरता के कायण क्रम भी आयोदों त करवा रहे हैं | उनके द्वारा दवशेर्ष तौर से अंधदवश्वास-अंधश्रद्धा की रोकथाम हेतु ों ागरूकता कायण क्रम भी आयोदों त कराये ों ा रहें हैं|
एस. सी िमाि

एस. सी वर्मा ने अपूनी वकालत की शुरुआत दों ला न्यायालय, रायपूुर से की और एक साल बाि मध्य प्रिेश उच्च न्यायालय आकर वररष्ठ अदधवक्ता श्री एस.सी ित्त के साथ कायण करने लगे | उन्ोंने 2000 में छत्तीसगढ़ दनमाण ् के बाि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, दबलासपूुर में अपूनी वकालत शुरू कर िी | वह बार काउंदसल के एक सम्मानीय सिस्य हैं और कई मानवादधकार और सामादों क न्याय के मामलों में पूैरवी कर चुके हैं दों नमें गगन िास केस मुख्य रूपू से शादमल है | इस केस में न्यायालय ने छत्तीसगढ़ पूुदलस द्वारा उड़ीसा के कुछ नागररकों को दगरफ्तार दकये ों ाने के कृत्य को गलत ठहराया और इस मामले में एस.आई.टी द्वारा ों ांच का आिेश दिया | एस.सी वमाण ने कई ों नदहत यादचकाओं की भी पूैरवी की है दों नमें गौरव पूथ का मामला मुख्य रूपू से शादमल है | इसके साथ ही वह अंतागढ़ चुनाव ररश्वत-मामले में भी पूैरवी कर चुके हैं |

तितिज दुबे
क्षितिद दुबे दंतेवाडा के रहने वाले हैं और वह कई वर्षों तक अदभयोों न अदधकारी के पूि पूर कायण रत रहे हैं और अपूने कायण को पूारिदशण ता से दनभाया | वह 2016 में ह्यरमन राईट्स लॉ नेटवकण से ों ुड़े और बस्तर में लगातार बड़ते पूुदलस िमन के दनभीकता से फों ी नक्सलवाि के मुकद्मे में फसाए गए आदिवादसयों के दलए क़ानरनी पूैरवी कर रहे हैं. उन्ोंने आदिवादसयों के गैरकानरनी दहरासत और मार दपूट के भी कई मामले उठाये हैं.

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