मुबारक
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दिसंबर 08, 2017

Rajsamand victim Muhamamd Afrazul’s family shattered after gruesome killing in the name of love jihad

नफरत की बलि चढ़े मुहम्मद अफराज़ुल की तस्वीर के साथ उसका परिवार.

अपनों की मौत अपने आप में दुनिया हिला देने वाला हादसा होती है. उस पर अगर मौत स्वाभाविक न होकर किसी हत्यारे की वहशियाना करतूत का नतीजा हो तो दर्द सीमा से परे चला जाता है. राजस्थान के राजसमंद में अंधी नफ़रत की बलि चढ़े मुहम्मद अफराज़ुल के परिवार का आक्रोश देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेजा कांप जाएगा.

मुहम्मद अफराज़ुल की बीवी गुल बहार ने इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर बातचीत की. वो कहती हैं ,

“जिन्होंने मेरे पति का बेरहमी से क़त्ल किया और उस घटना का वीडियो फैलाया उनका भी यही हश्र होना चाहिए. उन्हें फांसी पर टांग देना चाहिए. हमें इंसाफ चाहिए.”
आगे कहती हैं,

“हमें राजस्थान पुलिस का फोन आया कि उनकी हत्या हो गई है. एक झटके में मेरा परिवार तबाह हो गया.”
48 साल के मुहम्मद अफराज़ुल अपने घर के इकलौते कमाऊ मेंबर थे. पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के सैयादपुर गांव में सारा परिवार रहता है. अफराज़ुल इसी महीने गांव जाने वाले थे. उन्हें अपनी सबसे छोटी बेटी की शादी की तैयारियां करनी थी. पिछले 12 साल से वो राजस्थान में काम कर रहे थे. अभी दो महीने पहले ही घर होकर आए थे.

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अफराज़ुल की बेटी रेजिना खातून का आक्रोश बर्दाश्त से परे है. इंडियन एक्सप्रेस से वो कहती हैं,

“हमने उनसे मंगलवार को बात की थी आखिरी बार. वो हमें रोज़ फ़ोन करते थे. लव जिहाद क्या बला है हमें नहीं पता.”
आगे जो कहती है वो कलेजा हिला देगा.

“उन्होंने कसाई की तरह मेरे पिता को काट डाला, फिर आग के हवाले कर दिया. मैंने वीडियो देखा है और अपने असहाय बाप की चीखें सुनी हैं.”
पड़ोसी इब्राहिम शेख पूछते हैं कि अब उनके परिवार का क्या होगा! कमाई के इकलौते स्रोत को मार डाला गया है.

ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी हमारे मुल्क के लिए भयानक साबित होंगी. इस एक घटना ने पूरे मुल्क को हिलाकर रख दिया है. ये हत्या अपने आप में बड़ी ट्रेजेडी है ही, उससे ज़्यादा चिंताजनक वो आवाज़ें हैं जो इसे डिफेंड करती नज़र आ रही हैं. उस शख्स ने कैमरे पर ‘लव-जिहाद’ बोल दिया था. इतना काफी है लोगों को एक मर्डर डिफेंड करने के लिए. यकीन नहीं होता ये वही भारत देश है जहां दया, क्षमा, शांति की महत्ता सर्वोपरि हुआ करती थी.

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इस देश का भला चाहने वाले तमाम लोग इस ख़ौफ़ से भर गए हैं कि उस शख्स की सी निष्ठुरता कहीं अक्सरियत का राष्ट्रीय चरित्र न बन जाए. यहां वहां शेयर हुए उस वीडियो के नीचे आए कमेंट्स, इस ख़ौफ़ के हवा-हवाई होने की संभावना को खारिज करते हैं. ख़ून देखकर खुश होने वाली भीड़ में इज़ाफ़ा ही होता जा रहा है. नहीं समझ में आ रहा कि इसको रोकने के लिए क्या कर सकते हैं.

जहां तक हो सके सबको इसकी मुखर मुख़ालफ़त करनी चाहिए. इफ, किंतु, परंतु, बट लगाए बिना. हैवानियत अपना-पराया नहीं पहचानती. एक बार लहू मुंह लगने की देर है, फिर कोई सुरक्षित नहीं. जो भी इस खूंरेज़ी का समर्थन करे, खुल के या दबी ज़ुबान में, उससे नाता तोड़ लिया जाए. मर्डर जस्टिफाई करने वाला आपका, मुल्क का, इंसानियत का, किसी का सगा नहीं हो सकता. लिहाज में ओढ़ी चुप्पी मुल्क की ऐसी-तैसी फेर देगी.