ज़हीन की ज़हीन सी कविता …

ज़हीन की ज़हीन सी कविता …

ज़हीन की ज़हीन सी कविता …

कभी तितली सी उड़ती हूँ मैं
कभी शांत गंम्भीर समुद्र बन जाती हूँ
कभी झल्ली पगली लड़की हूँ मैं
कभी एकदम से समझदार औरत बन जाती हूँ
कभी तो दुनिया मे सब लोगों से प्यार हो जाता है
कभी हर किसी पे शक की सुई लहराती हूँ मैं
इतना रंग खुद के अंदर देख के हैरान हो जाती हूँ मैं
कितने विचार उमड़-उमड़ के तूफ़ां में बदल जाते हैं
जैसे कुएँ की मछली को झील मिल गया हो
पंछी को घोसले से निकलते ही पूरा आसमान मिल गया हो
कहने को तो साधारण लड़की हूँ मैं
पर खुद की इतनी ख़ूबी देख ख़ुद हैरान हूँ मैं,,,,,
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