कुमार विश्वास तुम राजनीति में सबसे जहरीले प्राणी हो : डॉ. अम्बेडकर ने जाति का बीज नहीं बोया था, बल्कि उन्होंने दलितों को तुम्हारी गुलामी से निकालने का काम किया था, जिस पर तुम आज तक इसलिए बिलबिला रहे हो, क्योंकि अब गाँव में कोई दलित तुम्हारी गुलामी नहीं कर रहा है और वह समाज में तुम्हारे बराबर खड़ा हो गया : कंवल भारती :

अफसोस होता है कुमार विश्वास जैसे बेवकूफ लोग अभी भी जातिव्यवस्था में विश्वास करते हैं और लोकतंत्र में भी धर्मतन्त्र के समर्थक बने हुए हैं । जरा इस ब्राह्मणवादी कुमार के बोल तो सुनो क्या कह रहा है ? वह कह रहा है एक आदमी (अम्बेडकर) जहां आकर जाति का बीज बो गया था । उससे पहले यहां जाति वाद नहीं था । सब मिलकर रहते थे । वह कह रहा है, एक मेहतरानी मेरी दादी के साथ शादी में साथ आई थी, (यानी दहेज के साथ आई थी)। वह मेहतरानी हमारे घर की बहू को घूंघट न करने पर हजार गालियां सुनाकर चली जाती थी और हम उसे कुछ नहीं कहते थे । यानी इतनी इज्जत थी उसकी।
कुमार जी पहले तो मैं तुम्हारी इस सामंती परम्परा पर थूकता हूँ, जिसमें मेहतरानी दहेज में भेजी जाती थी। दूसरे मैं तुम्हारी सामंती सोच पर थूकता हूँ, जो इस घृणित प्रथा को सही मानता है । डॉ. अम्बेडकर ने जाति का बीज नहीं बोया था, बल्कि उन्होंने दलितों को तुम्हारी गुलामी से निकालने का काम किया था, जिस पर तुम आज तक इसलिए बिलबिला रहे हो, क्योंकि अब गाँव में कोई दलित तुम्हारी गुलामी नहीं कर रहा है और वह समाज में तुम्हारे बराबर खड़ा हो गया है । तुम ब्राह्मणों को तुम्हारे गन्दे काम करने वाले गुलाम दलित चाहिए, जिसका रास्ता अम्बेडकर बन्द कर चुके हैं। इसलिए तुम जैसे घोर जातिवादियों को अम्बेडकर जातिवादी नजर आ रहे हैं।
कुमार विश्वास तुम राजनीति में सबसे जहरीले प्राणी हो। तुमने मेरी इस मान्यता को मजबूत कर दिया है कि ब्राह्मण कभी प्रगतिशील नहीं हो सकता।

कंवल भारती

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