पटना /
बाबरी मस्जिद की विध्वंस और डाॅ अंबेडकर की पुण्यतिथि के मौके पर आगामी 6 दिसंबर को पटना के अवर अभियंता भवन में वाम दलों का संयुक्त कन्वेंशन होगा. इस कन्वेंशन का मुख्य नारा होगा – *’उन्माद-उत्पात की भाजपाई राजनीति को शिकस्त दो, जनसंघर्षों को मजबूत करो’.* पटना के अलावा राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. कन्वेंशन बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ आरंभ होगा. शहर के विभिन्न गणमान्य व लोकतंत्र पसंद नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया है.

भाकपा के राज्य कार्यालय में आयोजित वाम दलों की बैठक में यह फैसला लिया गया. बैठक की अध्यक्षता भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने की. जबकि बैठक में माले के पोलित ब्यूरो सदस्य काॅ. धीरेन्द्र झा, राज्य स्थायी समिति के सदस्य काॅ. राजाराम; सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मंडल सदस्य सर्वोदय शर्मा, गणेश शंकर सिंह; सीपीआई के राज्य सचिव काॅ. सत्यनारायण सिंह व जानकी पासवान और एसयूसीआई (सी) के बिहार राज्य सचिव अरूण कुमार व सूर्यंकर जितेन्द्र उपस्थित थे.

बैठक में वाम नेताओं के बीच सहमति बनी कि भाजपा व संघ के नेतृत्व में देश व बिहार में चल रहे सांप्रदायिक फासीवादी अभियान को जनसंघर्षों के बूते ही पीछे धकेला जा सकता है और वाम दल ही इसका वैकल्पिक केंद्र हो सकते हैं. वाम दल के ही पास सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ संघर्ष की सुसंगत विरासत और विचारधारा है.

आज एक तरफ भाजपा व मोदी सरकार जनता के अधिकारों व रोजी-रोटी पर लगातार हमला कर रही है, तो दूसरी ओर आर्थिक सवालों से ध्यान हटाने के लिए हिंदु-मुसलमान के नाम पर सांप्रदायिक नफरत का माहौल खड़ा कर रही है. खासकर दलितों व अल्पसंख्यकों को आपस में लड़ाने का सांप्रदायिक कार्ड खेला जा रहा है, लेकिन दलित उत्पीड़न का मामला हो, या गौगुंडों की गुंडई अथवा महिलाओं पर अत्याचार की, इन घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हाल ही में दलित आंदोलन के नेता चंद्रशेखर आजाद पर रासुका लगा दिया गया है, जो बेहद निंदनीय है. देश में आज असहमति के स्वर को निर्ममता से कुचला जा रहा है और अघोषित आपातकाल की स्थिति पैदा कर दी गयी है. ऐसी स्थिति में आर्थिक हमले व सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ मजबूत एकता विकसित करते हुए हर मोर्चे पर लड़ने की जरूरत है.

बिहार की नीतीश सरकार आज पूरी तरह आरएसएस की गोद में खेल रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन कर रही है. पटना में जहां भाजपा को किसी भी इलाके में प्रदर्शन की छूट हासिल है, वहीं लोकतांत्रिक शक्तियों को इस अधिकार से वंचित किया जा रहा है. इसके विरोध स्वरूप 6 दिसंबर को अवर अभियंता भवन में कार्यक्रम की समाप्ति के उपरांत मार्च किया जाएगा और डाकबंगला चौराहा पर सभा आयोजित की जाएगी.

बैठक में कर्ज वापसी, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने और बटाईदारों सहित सभी किसानों को फसल क्षति का मुआवजा व अन्य सुविधाओं के सवाल पर किसानों के चल रहे देशव्यापी आंदोलन व दिल्ली में आयोजित किसान संसद के प्रति एकजुटता जाहिर की गयी और उनकी मांगों का पुरजोर समर्थन किया गया. ट्रेड यूनियनों द्वारा संसद के समक्ष महापड़ाव के प्रति भी वाम दलों ने अपनी एकजुटता जाहिर की.

वाम दलों ने कहा है कि एक तो बिहार सरकार शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन नहीं दे रही है, तो दूसरी ओर उनपर लगातार गैरशैक्षणिक कार्यों का बोझ लाद रही है. ‘खुले में शौच से मुक्ति’ के नाम पर महिलाओं व गरीबों को बेइज्जत व अपामानित करने का जो देशव्यापी कार्यक्रम चल रहा है, अब उसमें बिहार के शिक्षकों को भी लगा दिया गया है. यह बेहद निंदनीय है. हमारी मांग है कि सभी ठेका आधारित कर्मियों की सरकार स्थायी बहाली करे और उन्हें समान काम के लिए समान वेतन प्रदान करे. वाम दलों ने एएनएम कर्मियों के आंदोलन के प्रति भी अपनी एकजुटता जाहिर की.

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