धान की खेती को बचाने आगे आये जन संगठन कहा – पानी पर समाज का अधिकार, न कि उधोगों का : छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन

28 नवम्बर 2017

छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन ने राज्य सरकार द्वारा धान की खेती पर प्रतिबंध लगाकर उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर पानी देने के फैसले की कड़ी निंदा की तथा कहा हैं कि यह निर्णय जल पर समाज और किसानो के प्राकृतिक अधिकार के खिलाफ हैं l पानी समाज की सम्पदा हैं, न कि उदयोगों की निजी मिल्कियत l सरकार के इस निर्णय से न केवल किसान प्रभावित होंगे, बल्कि जल पर निर्भर मछुवारे सहित सभी समुदाय बर्बाद होंगे .

यहाँ उल्लेखनीय हैं कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही उदयोगों द्वारा नदी, नालो एवं जलाशयों सहित समस्त जल स्रोतों का अवैध दोहन किया जा रहा हैं, जिसके कारण सिंचित क्षेत्र में भी आम जनता पेयजल और कृषि सिंचाई से वंचित हैं l इन उदयोगों पर पहले से ही जलकर का सैकड़ो करोड़ रूपये बकाया हैं, इसे वसूलने के बजाये यह सरकार कृषि सिंचाई से वंचित किसानो से ही जबरदस्ती कर वसूलने में लगी हुई हैं l यह निर्णय बताता हैं कि किसान हित के तमाम दावों के वाबजूद इस सरकार ने अपनी प्राथमिकता में कृषि को हटाकर उदयोगों को बैठा दिया हैं .

छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन ने कहा हैं कि भाजपा सरकार ने यह निर्णय एशियन डेवलपमेंट की शर्तो पर घुटने टेकते हुए किया हैं, जो यह चाहती हैं कि इस प्रदेश की खाद्यान आत्मनिर्भरता को ख़त्म करके विकसित देशो की मांग के अनुरूप फसल चक्र परिवर्तन किया जाये l छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन ने आम किसान समुदाय का आह्वान किया हैं कि सरकार के इस निर्णय को ठुकराते हुए खादयान्न आत्मनिर्भरता को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर धान की खेती के आगे आयेंl आज की बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ किसान सभा, राजनांदगांव जिला किसान संघ, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मजदूर कार्यकर्ता समिति ) पेंड्रावन बचाओ किसान संघर्ष समिति, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति, जशपुर बचाओ समिति आदि जनसंगठनो ने इस मुद्दे पर प्रदेश व्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया हैं .
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* आलोक शुक्ला * संजय पराते

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