जज लोया मर गए तुम बोलो जय श्री राम :उस रात शेर ने न्यायपालिका का शिकार किया कहा न्याय व्यवस्था जटिल है, मामलों के त्वरित निपटारे के लिए अब से अदालत गुफ़ा बैठेगी _ अनुज श्रीवास्तव

 

अनुज श्रीवास्तव की कविता

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जज लोया मर गए
तुम बोलो जय श्री राम

मर गए या मार दिए गए
क्या फ़र्क पड़ता है
तुम बोलो जय श्री राम

अमित शाह के केस में सुनवाई कर रहे थे
फिर तो मरना ही था
तुम बोलो जय श्री राम

3 साल पहले मर गए
उसी समय अमित शाह की पार्टी सत्ता में आई थी
सोने पे सुहागा
तुम बोलो जय श्री राम

रिपोर्ट कहती है हार्ट अटैक से मरे
लेकिन शरीर पर थे ख़ून के धब्बे
खाखी चड्डी को बने हो गए हैं साल नब्बे
बोलो जय श्री राम

मरे हुए जज का फ़ोन
RSS का आदमी आता है छोड़ने
वो भी 3 दिन बाद
कहीं तो दबी है कोई बात
अब की बार…
बोलो जय श्री राम

घर वालों को बताए बिना
एक जज का हो जाता है पोस्टमॉर्टम
VIP गेस्ट हॉउस में रुका था बन्दा
पर ऑटो में लदा पहुचता है अस्पताल
इत्तेफ़ाक देखो के अस्पताल में ECG भी बन्द है
दया लात मारो दरवाज़ा बन्द है
मंदिर यहीं बनाएंगे राम की सौगंध है
बोलो जय श्री राम

जिस जज के रास्ते में
3 तरफ़ के सिग्नल रोक दिए जाते हैं
घर पहुचने में देर न हो करके
पुलिस वाले अंकल खुद बिझ जाते हैं
उसकी लाश के साथ एक्को पुलिस वाले नहीं जाते हैं
आपके नहीं पूछने से बन्धु सवाल थोड़ी न दब जाते हैं
चलो साथ मिल के पद्मावती पद्मावती चिल्लाते हैं
बोलो जय श्री राम

परसाई ने अपने एक व्यंग्य में कहा था
के जंगल के जानवरों ने जज से राजा की शिकायत की
उस रात शेर ने न्यायपालिका का शिकार किया
कहा न्याय व्यवस्था जटिल है
मामलों के त्वरित निपटारे के लिए
अब से अदालत गुफ़ा बैठेगी

नहीं आप डरिये मत
अच्छे दिन ज़रूर आएंगे
देखते रहिए
बहुत जल्दी आप भी मार दिए जाएंगे
मारे नहीं भी गए तो
शर्म के मारे ख़ुद मर जाएंगे
जिनके पास ख़ुद मर जाने की ये शर्म नहीं होगी
सिर्फ़ वे ही ज़िन्दा बच पाएंगे

अगर आप अब भी नहीं जागे
तो ये सारे बुरे सपने सच हो जाएंगे
आप राम नाम को सत्य भी नहीं कह पाएंगे

बोलो…..

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अनुज श्रीवास्तव की कविता

 

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