जो सोनी सोरी , बेला भाटिया ,  या मुझे नक्सली बता रहे हैं वे वही लोग हैं जो जिनकी वजह से आज लोग हथियार उठाने के लिए मजबूर हुए हैं .
कमल शुक्ला
(पत्रकार)
कोलकाता की एकसभा में
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वर्तमान समय में कई शब्दों के मायने सीधे उलटे हो गए हैं , जो देश को जोड़े रखने की सोचता है उसे देशद्रोही और जनता का लोकतंत्र मजबूत करने की सोचे उसे नक्सलवादी करार दिया जा रहा है | इसके ठीक उलटे जो देश को तोड़ने या बेचने की सोच रहे उन्हें देशभक्त और लोकतंत्र का गला घोटने वालों को विकास समर्थक बताया जा रहा है |
जो सोनी सोरी , बेला भाटिया ,  या मुझे नक्सली बता रहे हैं वे वही लोग हैं जो जिनकी वजह से आज लोग हथियार उठाने के लिए मजबूर हुए हैं | इन्हें बस्तर को कारपोरेट घरानो को सौंपने में अपना हित और मुनाफा दिख रहा है , बहुत पहले जब इन सबके पूर्वज बस्तर में जीवन यापन के लिए आये तो वहां के मालिक आदिवासियों ने उन्हें जमीन दी , स्वागत किया | पर अब ये उन्ही आदिवासियों के जीवन और जल जंगल की कीमत पर अपना विकास चाह रहे हैं |
आप देख लीजिये सरकार के तमाम दमनकारी नीतियों के पक्ष में केवल यही लुटेरा तबका खड़ा है , सरकार में शामिल आदिवासी जनप्रतिनिधि तक नहीं |
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