करोड़ों खर्च के बाद भी ,छत्तीसगढ़ मैं जंगल का रकबा घटा ,हाईकोर्ट ने वन विभाग और शासन से मांगा जबाब .

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21.11.2017 /बिलासपुर,पत्रिका न्यूज़ नेट वर्क

छत्तीसगढ़ मैं करोडों रुपये खर्च कर पौधरोपण के बाबजूद जंगल का रकबा घटने पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये सीजे टीबी राधा कृष्णन एवं जस्टिस शरद गुप्ता की युगल पीठ ने वन विभाग और छत्तीसगढ़ शाशन को नोटिस कर तीन सप्ताह में जबाब मांगा है.
याचिका मैं कहा गया है कि हरिहर योजना मैं 2017 मैं करीब 2 लाख पौधे लगाये गये ,वही 2016 मैं 7 करोड 60 लाख पौधे ,2015 मैं दस करोड़ पौधे लगाये गये ,पिछले 15 वर्षों मैं छत्तीसगढ़ मैं करोडो पौधे लगे ,इसके बाबजूद वन का रकबा तीन फीसदी यानी 3700 किलोमीटर कम हो गया .
याचिकाकर्ता रायपुर के नितिन सिंहवी ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 1986 से ही मध्यप्रदेश के समय से ही पौधरोपण तकनीकी से स्थान का चयन एक साल पहले ही कर लिया जाना चाहिए और उसके लिये गढ़े खुद जाना चाहिए और पौधारोपण की देखरेख तीन साल तक होनी चाहिये .
वनविभाग ने 2013 मैं निर्देश जारी किये कि हर हालत मैं 20 जुलाई तक पौधरोपण करना जरूरी है .बरसात या विषम स्थिति में यह काम 31 जुलाई तक पूरा हो जाये .लेकिन उसके लिए भी मुख्यालय से अनुमति लेना जरूरी है .


याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 2017 मैं तो हरिहर कार्यक्रम ही 20 जुलाई को शुरू किया गया जबकि अब तक तो पौधरोपण पूरा हो जाना था.

याचिका मैं यह भी कहा गया है की वनविभाग के पास 2001 से 2017 तक की पौधरोपण की जानकारी ही नहीं है .याचिका मैं मांग की गई है कि इस बाबत उचित आदेश जारी किये जाये , पौधरोपण वैज्ञानिक तरीके से और पौधों की पर्याप्त समय तक देखरेख और प्रोपर मोनिटरिंग की व्यवस्था की जाए .

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