रेटिंग, सर्टिफिकेट, डिग्री, सब बाज़ार का माल होता है! : मूडीज का मूड कैसे बदलता है?

(मूडीज की रेटिंग में भारत का स्थान ऊपर आने  की कहानी )
✍ मुकेश अलीम

मज़दूर बिगुल से साभार 

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2008 के बड़े आर्थिक संकट के लिए मूडीज़ को भी जिम्मेदार माना गया था| इस मामले में *अमेरिका के कई राज्यों ने इस पर झूठी और बढ़ा-चढ़ा कर दी गई रेटिंग के लिए मुकदमा दायर किया था|* संघीय सरकार का जस्टिस विभाग भी जांच कर रहा था| मूडीज ने उनके साथ इसी साल 14 जनवरी को समझौता कर 86 करोड़ डॉलर का देना मंजूर कर लिया ताकि मुकदमें में भारी जुर्माने से बच जाये| मामला यह था कि इसने बैंकों और उनके बांड्स, वगैरह को गलत ढंग से ऊँची रेटिंग देकर निवेशकों को गलत जानकारी पर उनमें पैसा फंसाने को ललचाया था| पहला मुक़दमा दायर करने वाले कनेक्टिकट के अटॉर्नी जनरल का कहना था कि मूडीज रेटिंग करवाने वाले बैंकों से पैसा लेकर उनकी कचरा सिक्योरिटीज को भी ऊंची रेटिंग देती थी|

एक दूसरी रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स पर भी मामला दायर किया गया था – उस पर 5 अरब डॉलर के हर्जाने का मुकदमा दायर हुआ था, जिसमें उसने अदालत के फैसले के बजाय 137 करोड़ डॉलर जुर्माना देकर समझौता कर लिया था|
पूंजीवाद हर चीज को जिंस में बदल देता है, इसमें सब बिकता है – रेटिंग, सर्टिफिकेट, डिग्री, सब बाज़ार का माल होता है!

शेक्सपियर तो बहुत पहले बता गए –

Gold? yellow, glittering, precious gold? ………
Thus much of this will make black white, foul fair,
Wrong right, base noble, old young, coward valiant.
This yellow slave
Will knit and break religions, bless the accursed,
Make the hoar leprosy adored, place thieves
And give them title, knee and approbation
With senators on the bench:

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Related link – https://www.reuters.com/article/us-moody-s-credit/moodys-pays-864-million-to-u-s-states-over-pre-crisis-ratings-idUSKBN14X2LP

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