अदानी के साथ मिलकर प्रशासन ने जनसुनवाई का उड़ाया मज़ाक ,कम्पनी ने सुबह से अपने फर्जी लोगो को लेकर सुनवाई को जाम करवाया .दूसरे गांवों से लोगो को खड़े किया लाईन में . तारा ओपन कास्ट .

अदानी के साथ मिलकर प्रशासन ने जनसुनवाई का उड़ाया मज़ाक ,कम्पनी ने सुबह से अपने फर्जी लोगो को लेकर सुनवाई को जाम करवाया .दूसरे गांवों से लोगो को खड़े किया लाईन में . तारा ओपन कास्ट .

**
12.11.2017

अम्बिकापुर / ग्राम तारा में परसा ओपन कास्ट परियोजना के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई ,जिसमे अजीब नज़ारा देखने को मिला ,जिनकी कोई जमीन नही जा रही थी उन्हें तो अडानी के लोग सुबह आठ बजे से गाड़ियों में भर कर ले आये और उन्हें समर्थन में बोलने के लिए लाइन में लगा दिया और जो प्रभावित गांव के लोग बोलना चाह रहे थे उन्हें रात को 11 बजे तक बोलने का मौका ही नहीं मिला .
जब प्रभावित ग्राम के लोग सुनवाई में पहुचे तब देखा कि अडानी के लोग अपने समर्थकों के साथ भरे पड़े है , पचास साथ गाड़ियों में लोगों को भर के लाया गया और पूरी तरह लाइन को जाम कर दिया गया ,किसी भी प्रभावित ग्रामीन को बोलने का अवसर नही दिया गया .

जिला प्रशाशन पूरी तरह अडानी की चाकरी कर रहा था उसकि मिलीभगत से ही यह सब किया जा रहा था ,फिर भी जिन एक दो को बोलने का मौका मिला उन्होंने पूरी दमदारी से इसका विरोध में अपने तर्क रखे और पूरी योजना की विसंगतियों को उघाड़ कर रख दिया .

राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के पक्ष में प्रशासन द्वारा खुली कोयला खदान तारा गांव में छत्तीसगढ़ बचाओं आंदोलन के साथी आलोक शुक्ला,ग्राम सभा परिषद से श्री मेहदी लाल, डी०पी०यादव, जन अधिकार संघ से गिरीश कुमार आदि ने पर्यावरण जन सुनवाई का तीव्र विरोध के साथ अपनी आपत्ति दर्ज कराया तथा संविधान की पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा की अनदेखी कर शासन- प्रशासन द्वारा जन सुनवाई करवाने को अवैध बताया। आलोक ने प्रशासन के आई०ई०ए० रिपोर्ट को गलत व विभिन्न तथ्यों को छिपाने वाला बताया।विभिन्न सूत्रों से प्राप्त सूचना अनुसार आदानी समूह द्वारा गांव परसा,केते, हरिहरपुर,घाटबर्रा,शाल्ही ,सल्का आदि गांव के लोगों को अपने निजी वाहन द्वारा जन सुनवाई स्थल तक लाया गया तथा आदानी कोयला कम्पनी के पक्ष में समर्थन करने पर एक -एक पैकेट भोजन व दो-दो सौ रुपए बतौर उपहार देने की बात गांव समाज द्वारा बताया गया ।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ल ने राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड व आदानी समूह पर आरोप लगाया कि एक गांव को उजाड़ने के लिये अन्य दूसरे गांव के लोगों से पर्यावरण जन सुनवाई में कम्पनी के पक्ष में समर्थन कराया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर गिरीश कुमार ने बताया कि भारत समेत पूरी दुनिया की ग्रामीण व पूरी शहरी सभ्यता विभिन्न नदियों के आसपास विकसित हुआ है,भूमि और जल सभी जीवों के जीवन का आधार है, सभी नदियों का उद्गम स्थल पहाड़ी क्षेत्र हैं और इन पहाड़ी क्षेत्रों में ही विभिन्न प्रकार के खनिज भी मौजूद हैं,आज निजी कंपनियों द्वारा विभिन्न खनिजों को निकालने की होड़ में सभी प्राकृतिक जल स्रोतों को जिनसे नदियों का अस्तित्व है,उन्हें बड़े ही बेरहमी से नष्ट किया जा रहा है जिससे भारत में बहने वाली प्रमुख नदियों की सहायक नदियाँ व सहायक नदियों के विभिन्न बारह मासी सहायक जल स्रोत खनन के कारण तेजी से समाप्त हो रहे हैं , जिससे देश की कई नदियां मृत हो गई तथा कई नदियों की जल प्रवाह खतरनाक तरीके से दिन -पर -दिन घट रही है , मीठे पानी का चार स्तर पर मुख्य मांग है 1. पीने के लिए 2. कृषि के लिये 3. उद्योगों के लिये 4. वन्यजीवों व पालतू पशुओं के लिये। किन्तु हमारी सरकार कम्पनियों के दबाव में बिना पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का सही आकलन किये बगैर खनन की मंजूरी देती जा रही है ।


ग्राम सभा परिषद के मेहदी लाल ने पर्यावरण लोक सुनवाई को अवैध व असंवैधानिक बताया, उन्होंनेआगे कहा कि यह सरगुजा क्षेत्र संविधान की पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है जहां ग्राम सभा स्वयंभू है उसकी अनदेखी कर, आदानी के दबाव में पर्यावरण जन सुनवाई करना गलत व पक्षपात पूर्ण है,जिसे खारिज किया जाना चाहिए। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार जिस वन क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर 425 प्रकार से ज्यादा वनस्पति की प्रजातियां पाये जाते हो वहाँ कोई प्रकार का उद्योग नहीं होना चाहिए,तारा वन क्षेत्र के सभी कम्पार्टमेंट में चार सौ पच्चीस से ज्यादा प्रकार के पेड़-पौधों की प्रजातियां है,NGT ने तारा वन क्षेत्र के 67% हिस्से को No go area घोषित किया हुआ है। इसके बाद भी इस क्षेत्रमें कोयला खनन हेतु पर्यावरण जन सुनवाई करना गलत है।

**

CG Basket

Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account