अमोल पालेकर ने ऐसा क्या कहा कि उनका भाषण रोका गया : bbc 

10 फरवरी 2019 इमेज कॉपीरइटCHIRANTANA BHATT मुंबई की नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न ऑर्ट में एक प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान मशहूर अभिनेता और निर्देशक अमोल पालेकर के भाषण को बार-बार रोका गया. शुक्रवार शाम कलाकार प्रभाकर बर्वे की याद में आयोजित प्रदर्शनी ‘इंसाइड द एंपटी बॉक्स’ के उद्घाटन के दौरान Continue Reading

दलित चिंतक ,बुद्धिजीवी ,साहित्यकार आनंद तेलतुंबड़े को प्रताडित करने के खिलाफ पामगढ में धरना प्रदर्शन ,राष्ट्रपति को दिया ज्ञापन .

10.02.2019/ पामगढ दलित विचारक ,चिंतक ,मानवाधिकार कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबड़े को केन्द्र की मोदी सरकार भीमा कोरेगांव प्रकरण में जबर्दस्ती घसीट रही हैं . उनका किसी केस से कोई लेना देना नहीं हैं .पिछले एक साल से पूरे देश में वकीलों ,लेखकों ,साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को चुन चुन कर निशाना Continue Reading

छत्तीसगढ़: बदलाव की मृग मरीचिका! :  महेंद्र दुबे !

19.02.2019 अधिवक्ता  महेंद्र दुबे . पिछले साल 11 दिसम्बर को जब छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीजे आये तो 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस खुद हैरान थी कि अपने ही क्षेत्रीय क्षत्रपों की आपसी जंग में सालों से उलझी पार्टी में ऐसे कौन से सुर्खाब के पर लगे थे Continue Reading

दस्तावेज़ ःः. भूमकाल बस्तर जब हिल उठा ःः  उत्तम कुमार

सम्पादक दक्षिण कोसल 10.02.2019 वर्तमान छत्तीसगढ़ के बस्तर में गोण्ड़ों की गौरवशाली परंपरा रही है। सीमाएं चाहे जो भी हो, पर यह कहना बिल्कुल सही होगी कि यह पूरा इलाका आदिवासियों का ही है। आदिवासियों ने सबसे ज्यादा विद्रोह बस्तर में किए थे। बस्तर के आदिवासियों ने 1774 से 1910 Continue Reading

जो काम रमन नहीं कर पाए ,  भूपेश ने कर दिखाया ःः  राजकुमार सोनी.

10.02.2019 अब से कुछ अरसा पहले रामगोपाल वर्मा निर्देशित और नागार्जुन अभिनीत एक फिल्म आई थी-शिवा. इस फिल्म में खलनायक का एक जोरदार संवाद था- गुंडे और मवालियों का धंधा लोगों के भीतर पैदा किए गए डर से ही चलता है. जिस रोज लोग डरना बंद कर देंगे… धंधा बंद Continue Reading

आज के हालात में साहित्य और कला ही समाज को नई दिशा दे सकता है ःः  #सांस्कृतिक चेतना ही समाज की संवाहक शक्ति #  □प्रलेस की संगोष्ठी में साहित्य कार उदय प्रकाश का व्याख्यान .बिलासपुर

9.02.2019 / बिलासपुर   समाज की प्रतिभागी ताकतों के विरोध में सदैव सांस्कृतिक शक्तियां ही पहले पहल खड़ी होती हैं । भारत की संस्कृति विभिन्न समुदायों के आपसी मेल मिलाप, भाईचारे की संस्कृति है और यही हमारी ताकत है, जो तमाम ऐतिहासिक संघर्षों में हमें जीवित रखे हुए हैं । उक्त Continue Reading