⭕ || पकड़ने की कला में निपुण नहीं होती देह || वर्षों पुरानी हो गयी है देह  भार नहीं संभाल पाती चुंबन […]

तुम्हारी तरह न मेरे पास शब्द पिरोने की कला है और ना ही शब्दों की कोई मोटी सी गठरी हा, […]