सावित्री बाई फुले और फ़ातमा शेख़ : सोचिए उस “दौरे जाहिलियत” में सामाजिक तौर पे बहिष्कृत कर दिए गए दंपत्ति को “शेल्टर” देना कोई हंसी ठट्ठे का खेल नहीं रहा होगा.: जुलैखा जबीं

जुलैखा जबीं ,सामाजिक कार्यकर्ता . अठारहवीं सदी के पेशवाई युग में ब्राह्मणों के दबाव में जोतिबा फुले के वालिद ने जब अपने शादीशुदा बेटे को घर से निकाल दिया तो सावित्री बाई भी अपने ख़ाविंद के हमराह घर से बाहर निकल आईं. जोतिबा के बचपन के दोस्त गंजपेठ (पुणे) के Continue Reading

पार्टी बदली है आईपीएस कल्लूरी की सत्ता नहीं :  उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल

05 .01.2019 दो जनवरी को गृह (पुलिस) विभाग के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ के बासी राजनीति में उबाल आ गया है। जो इस मुगालते में थे कि भाजपा के जाने से सत्ता में परिवर्तन हो गया है वे अब नाखुश होने लगे हैं। गृह विभाग के इस आदेश के तहत Continue Reading

सीडी कांड में आया रमन सिंह ,अरूण बिसेन और सुरेश गोयल का नाम.

अपना मोर्चा के लिये राजकुमार सोनी  रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड में कई रसूखदारों लोगों की संबंद्धता को लेकर अब तक दबी-दबी खबरें आती रही है या कहे कि खबरें दबा दी जाती रही है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार कुछेक वेबसाइटऔर एक-दो अखबारों ने तीरदांजी Continue Reading

ऑल इंडिया पीपल्स फोरम तैयार कर रहा है जनता का मांग पत्र : 12 जनवरी को रायपुर में सम्मेलन .

ऑल इंडिया पीपल्स फोरम (ए. आई. पी. एफ.) 2019 के आम चुनाव में भारतीय जनता की ओर से मांगपत्र 99% का भारत चाहिए, 1% का हर्गिज नहीं! विगत अक्टूबर 2018 को आल इंडिया पीपुल्स फोरम के द्वारा भुवनेश्वर (उड़ीसा ) में संपन्न राष्ट्रीय कन्वेंशन के माध्यम से, आगामी लोकसभा के Continue Reading

सलाम नसीर… ऐसे होते हैं रंगकर्मी… जैसे कि तुम हो… ःः राजेश चंन्द्र 

सलाम नसीर… ऐसे होते हैं रंगकर्मी… जैसे कि तुम हो… वैसे नहीं… , मौक़ापरस्ती और कायरता के जिन पुतलों से आज घिरे हैं हम… जिनकी वजह से ख़ुद को रंगकर्मी कहने में शर्म आती है… पर जब कोई नसीर बोल पड़ता है, तब लगता है कि हम जिन्हें रंगकर्मी कह Continue Reading

सबरीमाला ःः पितृसत्ता पर ढलक आए पत्रकार शजीला के आंसू. शाबास, पत्रकार शजीला-अली-फातिमा अब्दुलरहमान : उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल

5.01.2019 आपने एक दृश्य देखा होगा केरल में मंदिर प्रवेश को लेकर लाखों महिलाओं ने दो आंदोलनकारी महिलाओं के समर्थन में हाथ ऊपर कर समर्थन कर रहे थे। ये लाखों हाथ महिलाओं के ऊपर तमाम अत्याचारों के साथ पितृसत्ता रूपी शोषण का प्रतिकार है। आपको मालूम हो कि जब केरल Continue Reading

सलाम नसीर… ऐसे होते हैं रंगकर्मी… जैसे कि तुम हो… ःः राजेश चंन्द्र

सलाम नसीर… ऐसे होते हैं रंगकर्मी… जैसे कि तुम हो… वैसे नहीं… , मौक़ापरस्ती और कायरता के जिन पुतलों से आज घिरे हैं हम… जिनकी वजह से ख़ुद को रंगकर्मी कहने में शर्म आती है… पर जब कोई नसीर बोल पड़ता है, तब लगता है कि हम जिन्हें रंगकर्मी कह Continue Reading

सबरीमाला:रुढ़ीवाद ताकतों के खिलाफ युद्धरत औरतें ःः  जीवेश प्रभाकर

तोड़ ये अज़्म-शिकन दग़दग़ा-ए-पंद भी तोड़  तेरी ख़ातिर है जो ज़ंजीर वो सौगंध भी तोड़  (अज़्म-शिकन- संकल्प भंग करने वाला  दग़दग़ा-ए-पंद -उपदेश की सम्भावना) (कैफी आज़मी की नज़्म औरत से)         नए साल की नई सुबह इंकलाब लेकर आई। ये इंकलाब आधी आबादी से आया है । अपनी लड़ाई लड़ने आखिर औरतें Continue Reading