24.जहाँ विज्ञान खत्म होता है , क्या वहाँ से अध्यात्म शुरू होता है ? संदर्भ , नरेन्द्र दाभोलकर .

डा. नरेंद्र दाभोलकर इस सवाल का जवाब तर्कों के आधार पर देते हुए कहते हैं । आदि आत्मन इति आत्मन . आत्मा का विचार करना ही आध्यात्म का प्रचार करना है.आत्मा नाम की कोई चीज तो होती नहीं है । इसलिए कायदे से मुझे आत्मा के बारे में बात करने Continue Reading

चोरों ने तोड़े आठ मंदिरों के ताले ,चुरायी भगवान की आंखें,वस्त्र और घंटी.

तखतपुर / भास्कर पुलिस अपनी गश्त में कितनी चुस्त है इसकी पोल चोरों ने एक साथ दर्जन भर मंदिरों के ताले तोड़कर साबित कर दिया । चोरों ने भगवान के आभूषण और नैन उड़ा ले लिए । इस बात की जानकारी सुबह भक्तों मंदिरों में पूजा करने जाने पर हुई Continue Reading

12 जुलाई : विस्सारियन ग्रिगोरियेविच बेलिंस्की का जन्म.

प्रोम्थियस प्रताप सिंह विस्सारियन ग्रिगोरियेविच बेलिंस्की का जन्म 12 जुलाई 1811 को एक देहाती डॉक्टर के घर हुआ था। बचपन का अधिकतर समय पेंजा गुबर्निया के चेम्बर नामक कस्बे में बीता। उन दिनों भला कौन सोच सकता था कि वह छोटा-सा कस्बा आगे चलकर सुन्दर नगर का रूप धारण करेगा Continue Reading

14 . समाज सुधारकों का समाज पर कैसा प्रभाव पड़ता है ? : धर्म और जाति संबंधी दृष्टिकोण पर पुनर्विचार संदर्भ नरेन्द्र दाभोलकर.

दृष्टिकोण के विकास में समाजसुधारकों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है । वर्तमान संदर्भो में इस प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए डॉ . नरेन्द्र दाभोलकर ने कहा , ‘ ‘ महाराष्ट्र के समाज सुधारकों ने बहुत बड़ा काम किया है – शिक्षा के क्षेत्र में , मजदूरों के क्षेत्र में Continue Reading

आठवाँ सवाल :.क्या फलित ज्योतिष को शास्त्र की मान्यता प्राप्त है ? संदर्भ , धर्म और जाति संबंधी दृष्टिकोण पर पुनर्विचार संदर्भ नरेन्द्र दाभोलकर.

इसके जवाब में दाभोलकर कहते हैं – ‘ देखिए , कोई भी चीज़ शास्त्र है , यह कैसे सिद्ध हो सकता है ? इसके लिए वैश्विक स्तर के कुछ पैमाने हैं , जो नरेन्द्र दाभोलकर ने नहीं बनाए हैं . पहले कुछ अवधारणा या हाइपोथीसिस प्रस्तुत करना होता है तथा Continue Reading

हमारी पीढी बहुत कुछ जानने से वचिंत रह गई .

जंगल कथा से कबीर संजय चालीस पार कर चुकी हमारी पीढ़ी के लोग निश्चित तौर पर ऐसा बहुत कुछ जानते हैं, जिनसे हमसे आगे की पीढ़ी वंचित रह गई है. मैं सौ से ज्यादा किस्म के पेड़ों को पहचान सकता हूं। जानवरों की सौ से ज्यादा प्रजातियों और पक्षियों की Continue Reading

कल बहुत देर हो जाएगी टूमारो विल बी टू लेट.

कबीर संजय इस दुनिया में लगभग सात अरब लोग रहते हैं। गोरे, काले, पीले, गेहुएं। ईसाई, मुसलमान, बौद्ध, हिन्दू। लेकिन, हैरत की बात है कि इस पूरी दुनिया को सिर्फ दस लाख लोग संचालित करते हैं। इन सात अरब लोगों के जीवन का फैसला सिर्फ दस लाख लोगों के हाथ Continue Reading

‘देवदूत शैतान और विज्ञान ‘

प्रोम्थियस प्रताप सिंह की प्रस्तुति भारतीय वैज्ञानिक पी.एम भार्गव अपनी किताब ‘देवदूत शैतान और विज्ञान’ में लिखते हैं कि विज्ञान और धर्म के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि जहाँ विज्ञान अग्रमुखी है यानी आगे की ओर देखता है, वहीं धर्म पश्चमुखी है यानी पीछे की ओर देखता है। Continue Reading

दीवान पटपर : ढाल के विपरीत खिंचाव : अजय चंन्द्रवंशी

भोरमदेव-मैकल पर्वत क्षेत्र अपने पुरातत्विक अवशेष के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य, जंगल, गुफाओं, बैगा जनजाति के निवास और संस्कृति आदि के लिए भी जाना जाता है। यहां मैकल श्रेणी में कई अद्भुत गुफाएं और प्राकृतिक संरचनाएं हैं, जो धीरे-धीरे उजागर हो रही हैं। विभिन्न प्रकार के भौगोलिक स्थितियों सरंचनाओं,परिस्थितियों,ऊंचाई-नीचाई, ताप-दाब के Continue Reading

काकेर का निबरा गांव : आज़ादी के 71 साल बाद भी बच्चे पढ रहे है झोपड़ी मे. यही है विकास की मंजिल.

 सरकार चाहे कितने भी विकास के दावे करें, लेकिन सरकार की पोल उस वक्त खुल जाती है जब आजादी के 71 साल बाद भी बच्चे झोपड़ी में शिक्षा ग्रहण कर रहे हो। बस्तर के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां आज भी विकास की चिड़िया सिर्फ सरकारी कागजों में दिखाई देती Continue Reading