अजय चन्द्रवंशी का काव्य विश्लेषण मुक्तिबोध ने छोटी कविताएं बहुत कम लिखी है; उनकी कविताएं अधिकतर प्रदीर्घ हैं। और जो […]

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वे डरते हैं… वे डरते हैं बोलती हुई लड़की सेवे डरते हैं ज़बान लड़ाने वाली लड़की से वे डरते हैं […]

समीक्षक : अजय चंद्रवंशी स्त्री की विडम्बना और अस्मिता का द्वंद्व समकालीन कथा साहित्य में स्त्री स्वर अपनी मुखरता के […]

गौरीलंकेशन्यूज़ डॉट कॉम से साभार कन्नड़ के युवा कवि और पत्रकार सिराज बिसरल्ली (43) द्वारा सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ लिखी गयी […]

कला के ऐसे साधक कम ही हुए जैसे मनीष दत्त थे। नाटकों में कविताओं को संगीतबद्ध कर के उन्होंने कई […]

नासिर अहमद सिकंदर के इस कविता संग्रह “अच्छा आदमी अच्छा होता है” का समीक्षात्मक विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं कवर्धा […]

आलेख : अजय चन्द्रवंशी, कवर्धा (छ॰ग॰) निराला की कविताओं में ‘राम की शक्तिपूजा’ को अधिकांश विद्वानों द्वारा उनकी श्रेष्ठ कविता […]

रोहित वेमुला ने अपनी आत्महत्या से पूर्व जो ख़त लिखा था उसे पढ़ने के बाद जो तकलीफ़ मुझे हुई उसने […]