नुक्कड़ कैफे में शरद कोकास और मीर अली मीर का कविता पाठ .

प्रस्तुति अनुज श्रीवास्तव पिछले दिनों भिलाई के मशहूर हो रहे नुक्कड़ कैफे में शरद कोकास ने अपनी दो कवितायें , पिता हुये नाराज ,भाई ने दी धमकी मां ने बंद कर दी बातचीत ,उसने नाटक नहीँ छोड़ा ..और . स्त्री होना कितना दुखद है .. पानी का पाठ किया . Continue Reading

सियाह हाशिये। ( स्व . मंटो से क्षमायाचना सहित ) शाकिर अली .

27.04.2019 शाकिर अली जगदलपुर में 2004 से 2007 तक ग्रामीण बेंक में आडीटर के पद पर रहे ,अपने कार्यक्षेत्र में उन्हे  दक्षिण बस्तर के अंदरूनी  शाखाओं में बार बार जाना पडता था.इसी समय उन्होंने ” बचा रह जायेगा बस्तर”  कविता संग्रह तैयार किया .जब प्रकाशन के लिये उद्भावना में भेजा Continue Reading

⭕ आज पढ़ते हैं दस्तक़ समूह  की मित्र नंदिता राजश्री की कविताएँ…🌿 प्रस्तुत अनिल करमेले

पढ़ें और चर्चा ज़रूर करें.  1. || घरौंदा || उन मिट्टी के घरौंदों की कोई तस्वीर नहीं है पास मेरे जो रचती थी माँ.. बड़े प्यार से हर दिवाली.. उपर-नीचे कमरे होते और सबसे ऊपर एक बरसाती खिड़कियों और दरवाज़ों पर लेस के पर्दे उजले-नीले खंभों वाले बरामदे से सीढ़ियाँ Continue Reading

कवितायें ःः ज्योति शोभा ःः दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले

⭕ || पकड़ने की कला में निपुण नहीं होती देह || वर्षों पुरानी हो गयी है देह  भार नहीं संभाल पाती चुंबन गिर रहे हैं  केशों की रेखा पर रखे गए थे जो  अज्ञातवास के ईश्वर की तरह  जो वेदों से निकल कर घूमता है अर्धरात्रि की शीतल कालिमा में  टहक कर Continue Reading

तुम तो इश्क हो मेरा , जिसे जी भरके निहारने का दिल करता है ःः प्रियंका शुक्ला .

तुम्हारी तरह न मेरे पास शब्द पिरोने की कला है और ना ही शब्दों की कोई मोटी सी गठरी हा, जब जरूरत पड़े तो एक ऑक्सफोर्ड की शब्दकोश जरूर है.. पर भावनाओ को शब्दकोश में आखिर कैसे ढूंढ़ा जाए? अब तुम कोई राजनैतिक दल का विषय तो हो नहीं जिस Continue Reading

कवितायें : ० प्रदीप मिश्र , ⭕ दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले

|| कब्र को किस तरह कहेगा घर || एलन कुर्दी से कोई पूछेगा घर कहाँ है भूख से बिलबिलाते हुए उठेगा और एक विस्फोट हो जाएगा उसके हृदय में अपनी मासूमियत के चिथड़ों को समेटते हुए वह बनाएगा घर जिसमें भरी होगी बारूद की दुर्गंध वह किसी को नहीं बता Continue Reading

रायगढ़ को प्रदूषण मुक्त जोन बनाने में सरकार गंभीर नहीं,जन आंदोलन ही एकमात्र विकल्प ःः गणेश कछवाहा

9.12.2018 ,रायगढ  शीतकाल आते ही प्रदूषण की भयावहता नजर आने लगी है।ज़हरीले काले काले डस्ट छतों, पेड़ -पौधों,नदी-नालों, तालाबों, जलाशयों, यहां तक की घरों के कमरों के अंदर तक में खतरनाक रूप से बहुत स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। पैरों के तलवे काले हो जा रहे हैं।खुले में भोज्य पदार्थ Continue Reading

बहुत सुखद होता है अपनेपन का वह एहसास ःः सविता तिवारी

4.12.2018 ● “एहसास ” ● कभी कभी किसी अपरिचिता से मिलना बहुत ही खूबसूरत सी ख़ुशी का एहसास करा जाती है, लगता ही नहीं कि अपरिचिता है, प्यारे से चेहरे पर,प्यारी सी मुस्कान उनके अपने होने का एहसास करा जाती है, बहुत सुखद होता है अपनेपन का वह एहसास, जिसमें Continue Reading

सविता तिवारी की कविता “शून्य”

“शून्य” आज मन में और दिमाग में असंख्य कल्पनाएं थीं कि शून्य पर बहुत कुछ लिखूंगी पक्ष और विपक्ष पर सतत आलोचना और प्रशंसा कर शून्य का विस्तृत वर्णन करूंगी डायरी कलम लेकर बैठी अब तो पूरा शून्य का महिमा मंडन करना ही है, पर ये क्या हुआ अचानक हाथों Continue Reading

“शुभचिंतक” ःः  जिनके मानस पटल पर मैं छा गई हूँ…..सविता तिवारी 

कुछ ऐसे मेरे कुटिल शुभचिंतक जिनके मानस पटल पर मैं छा गई हूँ, दिन-रात, प्रति पल, हर क्षण, विचारों में जिनकी मैं समा गई हूँ, कुटिल मेरे शुभचिंतक, ईर्ष्या की आग में हर क्षण जलते रहते हैं, कैसे “सवि”को परेशान करें, निरंतर चिंतन मनन करते रहते हैं, दोस्तों को मेरे Continue Reading