एक गोंड गांव में जीवन: वेरियर एल्विन

शामराव द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने जब गांधी जी इंग्लैंड जा रहें थे, तब उसी जहाज में थे। गांधी जी से प्रभावित होकर वे उन्ही के साथ इंग्लैंड से वापस आ गए और कांग्रेस से जुड़ गए। डायरी में शामराव मुख्यतः चिकित्सक की भूमिका में अधिक दिखाई देते हैं। Continue Reading

गहरे वैचारिक संघर्ष के मूड़ में राहुल गांधी .

जगदीश्वर चतुर्वेदी हमने 2019 के चुनाव में एक राजनीतिक पार्टी का सामना नहीं किया बल्कि, हमने भारत सरकार की पूरी मशीनरी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी, हर संस्था को विपक्ष के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया गया था. ये बात अब बिल्कुल साफ़ है कि भारत की संस्थाओं की जिस निष्पक्षता की हम Continue Reading

क्या पोलोस्की को गांधी जी की हत्या का पूर्वानुमान हो गया था ?

क्या आपके ध्यान में गांधीजी की शहादत की कोई तस्वीर है? आशुतोष कुमार की फेसबुक से. ईसा मसीह का नाम आते ही सलीब पर टंगी हुई छवि याद आती है. इस छवि ने ईसा के करुणा-संदेश को दुनिया भर में फैलाने में ईसाई मिशनरियों से ज़्यादा बड़ी भूमिका निभाई है Continue Reading

कहीँ नहीं गये वो लोग .मिलिये दीदी कांट्रेक्टर से…

दीदी कांट्रेक्टर की उम्र अब लगभग पिच्चासी साल है . वो हिमाचल में सिद्धबाड़ी नामके गाँव में एक मिट्टी के छोटे घर में रहती हैं . दीदी के पिता जर्मन और माँ अमेरिकी थीं . दीदी की शादी एक गुजराती कांट्रेक्टर से हुई . दीदी ने हिमाचल में आकर अपने Continue Reading

शेर अली अफरीदी का नाम सुना है ? सच बताइयेगा, क्या आप देश के इस महान सपूत को जानते हैं ?नहीं न !

शेर अली अफरीदी का नाम सुना है? शेर अली अंडमान की जेल में काला पानी की सजा काट रहे थे। वो काला पानी की सजा के दौरान सोचा करते थे कि भारत की आज़ादी के लिए क्या किया जाय। उन्होंने मन ही मन एक प्लान बनाया। प्लान के तहत उन्होंने Continue Reading

इतिहास . कैसे पड़े लोकतांत्रिक संविधान के बीज .1215 ईसवी में जारी मैग्ना कार्टा को आधुनिक संविधान का जनक माना जाता है ,

भागीरथ www.downtoearth.org.in भारत समेत दुनियाभर के लोकतांत्रिक देश आज संविधान के अनुसार चल रहे हैं । ऐसे में यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि आखिर संविधान की नींव कब , कैसे और किन परिस्थितियों में गड़ी । आधुनिक संविधान की अवधारणा 1215 ईसवीं में ब्रिटिश राजतंत्र के दौर जारी Continue Reading

इतिहास ; पत्रकार और इतिहासकार फ्रिट्ज गेरलिच जिन्हें हिटलर ने आज ही मौत दे दी थी.

जलेश्वर उपाध्याय की वॉल से इतिहास_के_पन्नों_सेइतिहास के कुछ जख्म कभी भरते नहीं और न उनकी यादें मिटती हैं। आज का दिन ऐसा ही है, जब 1934 में हिटलर के हत्यारों ने अपने विरोधियों को मौत के घाट उतार दिया था। उनमें से एक थे पत्रकार और इतिहासकार फ्रिट्ज गेरलिच। फ्रिट्ज Continue Reading

जब योग का नस्लवादी दुरूपयोग हुआ था.

Via~ satyagrah.com प्रस्तुति : प्रोम्थियस प्रताप सिंह भगवद गीता का संस्क़ृत से जर्मन भाषा में पहला अनुवाद 1823 में हुआ था. इसे किया था जर्मनी के बॉन विश्वविद्यालय में भारतविद्या के प्रोफ़ेसर आउगुस्त विलहेल्म श्लेगल ने. गीता के छठें अध्याय में योगसाधना पर विस्तार से प्रकाश डाला गाया है. जनसाधारण Continue Reading

यह तस्वीर मानव इतिहास का वो दस्तावेज़ हैं जिस पर सभ्य समाज को नाज़ होना चाहिए.

(पहले ज़रा इस तस्वीर को इत्मीनान से देख लीजिए। ये तस्वीर मानव इतिहास का वो दस्तावेज़ हैं जिस पर सभ्य समाज को नाज़ होना चाहिए।) प्रोम्थियस प्रताप सिंह द्वारा प्रस्तुत दोनों हाथ छाती पर बांधे ये आदमी ऑगस्ट लैंडमेसर है। जब उसके चारों तरफ लोग नाज़ी सैल्यूट कर रहे हैं Continue Reading

बुध्द पूर्णीमा पर विशेष : बुद्ध विष्णु के अवतार नहीं है.. संजीव खुदशाह .

पिछड़ा वर्ग के अध्ययन से बुद्ध की जाति पर पुनर्विचार करना लाजमी है, क्योंकि इस जाति के आधार पर ही बुद्ध को ब्राम्हणों द्वारा विष्णु के दसवें अवतार के रूप में प्रतिस्थापित किया गया। इसी प्रतिस्थापना के खेल में बुद्ध की सारी उपलब्धियों पर पानी फेर दिया गया, क्योंकि इस स्थापना से Continue Reading