छत्तीसगढ़ में नहीं मिल रही [मैटरनिटी लीव] प्रसूति अवकाश  ,गैसरकारी संस्थाओ और संविदा नियुक्ति में निर्देश के बाद भी लागु नहीं हुआ आदेश .

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छत्तीसगढ़ में गैर सरकारी संस्थाओ और सरकारी संविदा नियुक्ति में कार्य कर रही महिलाओ को केंद्र के आदेश के बाबजूद मैटरनिटी लीव [प्रसूति अवकाश  ] नही दिया जा रहा हैं ,केंद्र सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिये है की उन्हें 26 सप्ताह का अवकाश दिया जाये ,केंद्र ने 17 मार्च को एक नए संशोधन के जरिये सभी राज्यों को दिए थे की महिला श्रमिको के साथ साथ सभी गैरसरकारी संस्थाओ में कर्यरत कामकाजी महिलाओ को अनिवार्य रूप  से प्रसूति अवकाश   का लाभ दिया जाये .

लेकिन केंद्र के स्पष्ट आदेश के बाबजूद भी छत्तीसगढ़ में इसे लागु नहीं किया गए ,प्रदेश में हजारो की संख्या में खुद सरकार ने 2004 से  महिलाओ को विभिन्न पदों पर संविदा नियुक्ति दी है ,इस समय ही यह नियम भी बनाया गया था की जो भी संविदा में नियुक्त महिकाए है उन्हें 12 सप्ताह का प्रसूति अवकाश   दिया जायेगा ,लेकिन वर्ष 2012  में यह अवकाश ख़तम कर दिय गया .

 

छत्तीसगढ बचाओ आन्दोलन

“‘छत्तीसगढ बचाओ आन्दोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने बताया की उन्होंने जानकारी प्राप्त की है की तो उन्हें बताया गया की अब संविदा नियुक्ति में कार्यरत कर्मचारी और अधिकारियो को प्रसूति अवकाश की पात्रता नही हैं “

 

उपायुक्त श्रम विभाग

“ श्री एस एल जांगडे ने बताया की महिलाओ को 26 सप्ताह का प्रसूति अवकाश दिया जाना अनिवार्य किया गया हैं ,केंद्र के निर्देश के बाद श्रम विभाग की ओर से सामान्य प्रशाशन विभाग को फाईल भेज दी गई हैं ,लेकिन वहा से नया निर्देश जरी नहीं किया गया हैं “

 

सचिव सामान्य प्रशाशन विभाग

“सचिव सामान्य विभाग श्री डीडी सिंह ने बताया की केंद्र ने कोई नियम बनाया है या नहीं इस बारे में श्रम विभाग ही बता सकता हैं ,यदि कोई नियम बना है तो उसे लागु करने का कम भी श्रम विभाग ही करेगा, “

प्रियंका शुक्ला  अधिवक्ता

महिलाओं को सम्मान देने वाली इस सरकार ने महिलाओं के सम्मान में अभी तक मैटरनिटी लीव का प्रावधान संविदा पर काम करने महिलाओ गैर सरकारी संस्थाओं पर लागू अभी तक नहीं किया है.सरकार द्वारा जवाब मांगे जाने पर सरकार का ही, अंग श्रम विभाग का यह कहना कि,हमने यहाँ से पास करके सामान्य प्रसाशन को भेज दिया है, इससे साफ़ देखा जा सकता है, कि यह अपने आदेश के प्रति सरकार खुद अपने ही नियमो व आदेशो का पालन नहीं कर रही है. इस तरह की टालामटोली व अपने ही आदेश को लागू नहीं करवा पाने से, सरकार की लापरवाही  यह साफ़ दर्शाती है कि, महिलाओं के प्रति यह सरकार कितनी सम्मानजनक व संवेदनशील है. यह देश आज भी आज भी लड़ने वाले व संघर्ष के लोगो से ये ही यह बचा हुआ है,यदि शीघ्र ही सरकार इस पर सही रुख नहीं अपनाती तो तमाम महिला आन्दोलन व संगठन के लोगो द्वारा इस पर आवाज बुलंद की जाएगी व जरुरत पड़ी तो सरकार सहित दोषी विभाग के खिलाफ केस भी दर्ज किया जायेगा.

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