क्या लगभग 7 वर्षों तक बिना अपराध जेल में रहने की तकलीफ से हिडमे कभी मुक्त हो पाएगी।

सुकमा के रहने वाले आयता पर आई जी एस आर पी कल्लूरी का दबाव था की आयता नक्सली बनाकर सरेंडर करे। आयता ने जब बस्तर आई जी कल्लूरी के दबाव के आगे झुकने से मना कर दिया, तो पुलिस ने उसकी पत्नी का अपहरण करा लिया। आदिवासियों ने थाने का घेराव करा उसकी पत्नी को छुड़ाया। फिर पुलिस ने आयता को गिरफ्तार कर नक्सली होने के 5 फर्जी केस बना दिये, और आयता को जेल में ठूंस दिया।
आज आयता को सभी मामलों में जमानत मिल गई है, और आयता फिर से आदिवासी हितों की लड़ाई लड़ने को आजाद है। ऐसे हजारों आयता छ्त्तीसगढ़ की जेलों में बंद हैं, और न्याय की राह देख रहे हैं।

गीदम की रहने वाली कवासी हिडमे को पुलिस ने उठाकर बलात्कार किया और फिर जेल में डाल दिया। कुछ महीने पहले अदालत ने उसे बाइज्जत रिहा कर दिया। हिडमे जेल में 6 वर्षों से अधिक का समय बिना अपराध बिता चुकी है। जब अनुसूचित आयोग ने पुलिस से इस मामले में पूछताछ करने पर पुलिस ने इस पूरे मामले को झूठला दिया, और कहा की कवासी हिडमे को गलत तरीके से पुलिस अभिरक्षा में रखना और प्रताड़ित करने का आरोप गलत पाया गया है। क्या हिडमे को कभी न्याय मिल पाएगा। क्या लगभग 7 वर्षों तक बिना अपराध जेल में रहने की तकलीफ से हिडमे कभी मुक्त हो पाएगी।

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