सहारा और बिड़ला द्वारा प्रधानमंत्री 
मोदी को 55 करोड़ रिश्वत देने की 
संपूर्ण कथा
प्रधानमंत्री मोदी जब 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की देश को सूचना दे रहे थे, उससे बहुत पहले सु्प्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण देश की प्रमुख आधा दर्जन से अधिक सरकारी जांच एजेंसियों को लिखकर बता चुके थे कि न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ने ​बल्कि देश के अन्य तीन और मुख्यमंत्रियों ने करोड़ों का कैश उद्योगपतियों से वसूला है… प्रशांत भूषण ने जिन एजेंसियों को डाक्यूमेंट्स भेजे हैं, उनमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा कालेधन को लेकर बनाई गई दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम, निदेशक सीबीआई, निदेशक ईडी, निदेशक सीबीडीटी और निदेशक सीवीसी शामिल हैं…
भारत सरकार के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से किए गए रेड के जो डाक्यूमेंट्स दिल्ली के पत्रकारों और नौकरशाहों के दायरे में घूम रहे हैं उनके मुताबिक, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी को सुब्रत राय के सहारा इंडिया ग्रुप से जुड़े किसी ‘जायसवाल जी’ ने करोडों रुपए कैश में दिए. पत्रिका को हाथ लगे डाक्यूमेंट्स से साफ है कि 30 अक्टूबर 2013 और 29 नवंबर 2013 को गुजरात सीएम, मोदी जी के नाम से 13 ट्रांजेक्शन हुए… इन ट्रांजेक्शन से पता चलता है कि 13 ट्रांजेक्शन में 55.2 करोड़ रुपए मोदी जी और गुजरात सीएम के नाम से दिए गए… हालांकि पत्रिका का यह भी मानना है कि यह बहुत साफ नहीं हो पा रहा है कि ट्रांजेक्शन 13 हुए या 9 ट्रांजेक्शन में 40.1 करोड़ रुपए जमा किए गए…
इसके अलावा सहारा ग्रुप से जुड़े जायसवाल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी करोड़ों के रुपए कैश में दिए… करोड़ों का कैश लेने वालों में भारतीय जनता पार्टी की कोषाध्यक्ष शायना एनसी भी शामिल हैं… इस रिपार्ट का विस्तृत खुलासा करने वाले वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता का कहना है कि कारवां और इकॉ​नॉमिक एंड पॉलिटिकल ​वीकली पत्रिका ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से मिले सबूतों के आधार पर सभी नेताओं को सफाई के लिए ईमेल किया है… पर 17 नवंबर को किए गए ईमेल का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी कोषाध्यक्ष शायना एनसी, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री रमन सिंह, मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित में से किसी ने अबतक नहीं दिया है…
प्रधानमंत्री से लेकर तीन-तीन मुख्यमंत्रियों द्वारा कैश में करोडों का कालाधन लेने के इस मामले का खुलासा इनकम टैक्स की डिप्टी डाइरेक्टर अंकिता पांडेय ने किया था… इन कागजातों पर उनके अलावा भारत सरकार के दूसरे अधिकारियों के भी दस्तखत हैं… यह डाक्यूमेंट देश के तमाम पत्रकारों और सरकार अधिकारियों के पास है.

कहानी ये है

अक्टूबर 2013 से नवम्बर 2014 में क्रमशः सहारा और आदित्य बिड़ला के ठिकानों पर इनकम टैक्स के छापे पड़े थे. यहां से आयकर अधिकारियों को दो महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे । जिनमें सरकारी पदों पर बैठे कई लोगों को पैसे देने का जिक्र था। इसमें प्रधानमंत्री मोदी का नाम भी शामिल था. बिड़ला के यहां से जब्त दस्तावेज में सीएम गुजरात के नाम के आगे 25 करोड़ रुपये लिखा गया था. इसमें 12 करोड़ दे दिया गया था, बाकी पैसे दिए जाने थे.
इसी तरह से सहारा के ठिकानों से हासिल दस्तावेजों में लेनदारों की फेहरिस्त लम्बी थी जिसमें सीएम एमपी, सीएम छत्तीसगढ़, सीएम दिल्ली और बीजेपी नेता सायना एनसी के अलावा मोदी जी का नाम भी शामिल था. मोदी जी को 30 अक्टूबर 2013 से 21 फ़रवरी 2014 के बीच 10 बार में 40.10 करोड़ रुपये की पेमेंट की गई थी. खास बात ये है कि तब तक मोदी जी बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार घोषित किए जा चुके थे.
सहारा डायरी की पेज संख्या 89 पर लिखा गया था कि ‘मोदी’ जी को ‘जायसवाल जी’ के जरिये अहमदाबाद में 8 पेमेंट किए गए. डायरी की पेज संख्या 90 पर भी इसी तरह के पेमेंट के बारे में लिखा गया है. बस अंतर केवल इतना है कि वहां ‘मोदी जी’ की जगह ‘गुजरात सीएम’ लिख दिया गया है, जबकि देने वाला शख्स जायसवाल ही थे. मामला तब एकाएक नाटकीय मोड़ ले लिया जब इसकी जांच करने वाले के बी चौधरी को अचानक सीवीसी यानी सेंट्रल विजिलेंस कमीशन का चेयरमैन बना दिया गया. प्रशांत भूषण ने उनकी नियुक्ति को अदालत में चुनौती दी.
इस साल 25 अक्टूबर को प्रशांत भूषण ने सीवीसी समेत ब्लैक मनी की जांच करने वाली एसआईटी को सहारा मामले का अपडेट जानने के लिए पत्र लिखा. ख़ास बात यह है कि उसी के दो दिन बाद यानी 27 अक्टूबर को दैनिक जागरण में 500-1000 की करेंसी को बंद कर 2000 के नोटों के छपने की खबर आयी. बताया जाता है कि के बी चौधरी ने वित्तमंत्री अरुण जेटली को इसके बारे में अलर्ट कर दिया था.
उसके बाद सहारा ने इनकम टैक्स विभाग के सेटलमेंट कमीशन में अर्जी देकर मामले के एकमुश्त निपटान की अपील की. जानकारों का कहना है कि कोई भी शख्स इसके जरिये जीवन में एक बार अपने इनकम टैक्स के मामले को हल कर सकता है और यहां लिए गए फैसले को अदालत में चुनौती भी नहीं दी जा सकती है. साथ ही इससे जुड़े अपने दस्तावेज भी उसे मिल जाते हैं जिसे वह नष्ट कर सकता है. अदालत या किसी दूसरी जगह जाने पर यह लाभ नहीं मिलता. चूंकि मामला पीएम से जुड़ा था इसलिए सहारा इसको प्राथमिकता के आधार पर ले रहा था.
बताया जाता है कि सेटलमेंट कमीशन में भी मामला आखिरी दौर में था. भूषण ने 8 नवम्बर को फिर कमीशन को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने मामले का अपडेट पूछा था. शायद पीएम को आने वाले खतरे की आशंका हो गई थी जिसमें उनके ऊपर सीधे-सीधे 2 मामलों में पैसे लेने के दस्तावेजी सबूत थे. उनके बाहर आने का मतलब था पूरी साख पर बट्टा. मामले का खुलासा हो उससे पहले ही उन्होंने ऐसा कोई कदम उठाने के बारे में सोचा जिसकी आंधी में यह सब कुछ उड़ जाए. नोटबंदी का फैसला उसी का नतीजा था.
इसे अगले साल जनवरी-फ़रवरी तक लागू किया जाना था, लेकिन उससे पहले ही कर दिया गया. यही वजह है कि सब कुछ आनन-फानन में किया गया. न कोई तैयारी हुई और न ही उसका मौका मिला.  यह भले ही 6 महीने पहले कहा जा रहा हो लेकिन ऐसा लगता है उर्जित पटेल के गवर्नर बनने के बाद ही हुआ है, क्योंकि नोटों पर हस्ताक्षर उन्हीं के हैं. छपाई से लेकर उसकी गुणवत्ता में कमी पूरी जल्दबाजी की तरफ इशारा कर रही है.
इस मामले में फेसबुक पर आए कुछ प्रमुख पोस्ट्स इस प्रकार हैं…
Sheetal P Singh : नोटबंदी और मोदी जी का हवाला… CM मोदी ने 2012 में आदित्य बिड़ला ग्रुप से पच्चीस करोड़ रुपये घूस के तौर पर हवाला ट्रांजैक्शन से लिये! दिल्ली विधानसभा में यह आरोप लगा और income tax deptt का यह संलग्नक पेश किया गया। Income tax deptt ने २०१३ की एक रेड में आदित्य बिड़ला ग्रुप का एक लैपटॉप ज़ब्त किया था । यह दस्तावेज़ वहाँ से मिला था । फ़िलहाल यह मामला दरी के नीचे था पर अब केजरीवाल ने इसे पर लगा दिये! ग़ौरतलब है कि मोदी जी की शैक्षणिक योग्यता का सवाल भी केजरीवाल द्वारा उठाये जाने पर मोदी जी के हलक में अटका हुआ है। ये दूसरा सहारा ग्रुप का काग़ज़ है। दिल्ली विधानसभा की कल की बहस में रिकार्ड पर आ गया। यह भी इनकम टैक्स के दस्तावेज़ों में है। यह बताता है कि CM मोदी को ढाई सौ करोड़ रुपये २०१३ से पहले दिये गये! इसकी पड़ताल और इस पर राजनैतिक बवाल होना चइये कि नंई चइये?
Sarvapriya Sangwan : प्रशांत भूषण ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ को लिखित शिकायत की है कि इनकम टैक्स और सीबीआई के छापों के दौरान कुछ दस्तावेज़ निकल कर आये हैं जिससे पता चलता है कि देश की दो बड़ी उद्योग कंपनियों ने कई मुख्यमंत्रियों और सांसदों को घूस दी है। सहारा के यहाँ 22 नवंबर 2014 को छापा पड़ा था। आदित्य बिरला ग्रुप पर 15 अक्टूबर 2013 को छापा पड़ा था। ये जो दस्तावेज़ हैं, इन पर इनकम टैक्स अफसर के दस्तख़त हैं, गवाह भी मौजूद हैं।  भूषण जल्दी ही सुप्रीम कोर्ट जायेंगे। दिल्ली विधानसभा में इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ज़्यादा खुले तौर से रखा। उनके पास भी वे सब दस्तावेज़ मौजूद थे जिसमें नरेंद्र मोदी को घूस दिए जाने की बात है। घोटालों और भ्रष्टाचार के विरोध में देशभक्ति की दुहाई देने वालों से उम्मीद है कि वो राजनीतिक रुझान की वजह से चुप नहीं बैठेंगे। अगर ये आरोप गलत हैं तो प्रधानमंत्री को मानहानि का दावा ठोकना चाहिए।
Arun Maheshwari : दिल्ली की विधान सभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आयकर विभाग के उन मौलिक दस्तावेज़ों को रखा है जिनमें सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उद्योगपतियों से घूस लेकर उनके काम करने के लिये अभियुक्त बताया गया है। केजरीवाल ने राष्ट्रपति से माँग की है कि वे सुप्रीम कोर्ट के जज के ज़रिये इन दस्तावेज़ों की जाँच करने के निर्देश जारी करें।

Dilip Khan : प्रधानमंत्री को कोई सीधे-सीधे घूसखोर कह रहा है और प्रधानमंत्री चुप है। जांच करवाकर तमाचा मार दीजिए केजरीवाल के मुंह पर। अगर झूठ बोल रहा है तो पकड़ा जाएगा। हिम्मत कीजिए। आयकर विभाग का काग़ज़ सबको दिखा दीजिए। बता दीजिए कि सुवेन्दु अमिताभ ने आपको 25 करोड़ रुपए नहीं दिए थे। बिड़ला ग्रुप के सुवेन्दु अमिताभ ने नरेन्द्र मोदी को 25 करोड़ रुपए घूस दिया- विधानसभा में केजरीवाल का आरोप। आयकर विभाग के दस्तावेज़ों के साथ बंदे ने ये बात कही है। नरेन्द्र मोदी को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। केजरीवाल ने कल दिल्ली विधानसभा में नरेन्द्र मोदी पर गंभीर इल्ज़ाम लगाए। आयकर विभाग के दस्तावेज़ दिखाते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी घूसखोर है। कॉरपोरेट घरानों से घूस लेकर उनका काम करते हैं। केजरीवाल ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने बिड़ला ग्रुप के सुवेन्दु अमिताभ से 25 करोड़ रुपए घूस ली। मोदी जी को इस आरोप के बाद तो पद छोड़ ही देना चाहिए और अगर वो मानते हैं कि आरोप ग़लत है तो केजरीवाल पर मुक़दमा करें। जेल भेज दें केजरीवाल को। पर दोनों में से कुछ नहीं कर रहे। चुपचाप रफा-दफ़ा करना चाहते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह, सर्वप्रिया सांगवान, अरुण माहेश्वरी और दिलीप खान की एफबी वॉल से.

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