रायपुर : दारू के अड्डे में किताब का विमोचन

अपना मोर्चा में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सोनी की रिपोर्ट

रायपुर. देश-प्रदेश के आत्ममुग्ध लेखकों और साहित्यकारों को यह खबर थोड़ी खराब लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है कि छत्तीसगढ़ के एक लेखक किशनलाल ने अपनी तीसरी किताब चीटियों की वापसी का विमोचन दारू के अड्डे (अहाते ) पर किया. इस जगह का चयन  क्यों किया गया…? इस बारे में स्वयं किशनलाल कहते हैं- उपन्यास में जो मजदूर पात्र शामिल है वे यहीं आसपास रहते हैं. जिनके लिए लिखा गया है वहीं लोग इसका विमोचन करें… यह उनकी हार्दिक इच्छा थीं.


सामान्य तौर पर सभ्य लोग जिनमें साहित्यकार भी शामिल है वे शराब दुकान जाने से हिचकिचाते हैं. कभी जाना भी हुआ तो मुंह पर कपड़ा बांधकर बचते-बचाते पहुंचते हैं और चुपके से बोतल लेकर घर का रूख कर लेते हैं. हालांकि जब हरिवंश राय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी तब शराब ठिकानों का एक क्रेज हुआ करता था… धीरे-धीरे साहित्यकार सिर्फ बेवड़े होकर रह गए और साहित्य पीछे छूट गया. अब साहित्यकार या तो बंद कमरे में लिखते हैं या फिर सरकारी खर्चें पर विश्वविद्यालयों में लेक्चर देते हुए नजर आते हैं. लेखक किशनलाल कहते हैं- मैं जब शराब ठिकाने के अहाते में आयोजन के बारे में सोच रहा था तब यह सवाल भी सामने आया कि शराबखाना या आहाता पवित्र नहीं है, लेकिन मेरे लिए हर जगह पवित्र है. दूसरी एक बात यह भी है कि ऐसी जगहों पर कार्यक्रम करने पर किराया नहीं देना पड़ता है. लेखक ने कहा कि अधिकांश साहित्यकार संकीर्ण, पूर्वाग्रही और दोहरा चरित्र रखकर जीते हैं. तथाकथित मुख्यधारा के साहित्यकार दलित साहित्य को हेय और उपेक्षा की दृष्टि से देखते हैं जबकि गुणवत्ता की दृष्टि से हमारा लेखन भी किसी से कम नहीं है.    

आपको बता दें कि कार्यक्रम राजधानी के आमा सिवनी स्थित शराब दुकान के अहाते में किया गया. कार्यक्रम को देखने-सुनने के लिए बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा चालक, बढ़ई, मिल-कारखानों के मजदूर व भवन निर्माण करने वाले कामगार मौजूद थे. कार्यक्रम के अतिथि के रूप में रूपचंद रात्रे, तुलेश्वर सोनवानी, जितेन्द्र चेलक और छोटू जोशी मौजूद थे. ये सभी मजदूर राजधानी के डॉ. भीमराव अंबेडकर वार्ड के मोवा निवासी हैं जो कि उपन्यास के पात्र हैं. अतिथियों के स्वागत व कृति के विमोचन के बाद लेखक किशनलाल ने उपन्यास के महत्वपूर्ण हिस्से का पाठ किया. कार्यक्रम इतना दिलचस्प हो गया था कि लोग कुछ देर के लिए शराब पीना छोड़कर बड़े ध्यान से रचनाकार के पाठ को सुनने लगे थे.

नवभारत में छपी थी पहली कविता

किशनलाल नाम छत्तीसगढ़ के साहित्य-पाठकों के लिए कोई नया नहीं है. इनकी कई कविताएं, कहानियां, व्यंग्य, लेख आदि रायपुर से प्रकाशित विभिन्न समाचार पत्रों के अलावा राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं. साथ ही दर्जनों कविताएं और कहानियां आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित हो चुकी हैं. किशनलाल ने बताया कि उनकी कविता पहली बार नवभारत में ही प्रकाशित हुई थी. जब वे बीए में पढ़ रहे थे तभी पहली बार आकाशवाणी रायपुर में उनकी कविताएं प्रसारित हुई थीं। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक पत्रिकाएं सूत्र, ककसाड़, वागर्थ, बया सहित अन्य में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी है.

कई अखबारों में कर चुके हैं काम

केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय सहित विभिन्न हायर सेकंडरी स्कूलों में हिन्दी अध्यापन कर चुके  उपन्यासकार किशनलाल एक बेहतर पत्रकार भी हैं. वे प्रखर समाचार, देशबंधु, जनसत्ता, नवभारत, पत्रिका और पायनियर जैसे अखबारों में उप संपादक की हैसियत से कार्य कर चुके हैं.  वर्तमान में वे राजधानी के एक वेब न्यूज चैनल में वरिष्ठ उपसंपादक के तौर पर कार्यरत है.

कविता से ही हुई थी शुरूआत

छत्तीसगढ़ के एकमात्र दलित उपन्यासकार के रूप में ख्यात किशनलाल ने अपने लेखन की शुरुआत कविताओं से की थी। इनका पहला काव्यसंग्रह ‘जहां कवि होगा’ उद्भावना प्रकाशन गाजियाबाद से प्रकाशित हुआ है. दूसरी कृति के रूप में इन्होंने दलित चेतना पर केंद्रित अपना पहला उपन्यास ‘किधर जाऊं’ लिखा. इस उपन्यास से किशनलाल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. इसी कृति पर उन्हें लखनऊ से प्रथम लोकोदय नवलेखन सम्मान प्राप्त हुआ. इसके अलावा उन्हें  स्व. बंशीलाल भारद्वाज साहित्य व पत्रकारिता सम्मान भी मिल चुका है. ‘चींटियों की वापसी’ एक उपन्यास है जो पूरी तरह रायपुर शहर पर केंद्रित है.

( किशनलाल को इस मोबाइल नंबर पर बधाई दी जा सकती है- 7389714155

Anuj Shrivastava

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