मुरैना ःः भाजपा का घोषण पत्र सिर्फ छलावा है,किसानों की कर्ज मुक्ति का मुद्दा नहीं है घोषणा पत्र में शामिल.ःः मेघा पाटकर

मुरैनाःः 23.11.2018

नर्मदा बचाओ आंदोलन की संस्थापक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज सुधारक मेघा पाटकर ने शनिवार को मुरैना के जौरा के भ्रमण के उपरांत मुरैना में मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने किसानों की कर्ज मुक्ति का मुद्दा अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया है। भाजपा का घोषणा पत्र सिर्फ छलावा नजर आता है।

● मेधा पाटकर ने बताया कि भूमि अधिग्रहण के नाम पर सरकार किसानों की जमीन को अधिग्रहण कर रही है और उन्हें पुन: विस्थापित के लिये कोई रणनीति तैयार नही की जा रही है। इतना ही नहीं मुम्बई-वडोदरा हाईवे के दौरान 5500 घरों को तोड़ा गया। इनमें कई ऐसे घर भी थे जो पिछले 100 वर्षो से अधिक समय से बसे हुये है किन्तु सरकार ने उन्हें पुनर्वासित करने का कोई विचार नहीं किया गया। बेदखली का अड्डा बने मध्यप्रदेश में भाजपा के घोषणापत्र में विस्थापन या विस्थापित शब्द तक नहीँ है ।
● अब चम्बल के किसानों की 10 हजार हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण करने की रणनीति तैयार की गयी है। चम्बल में किसानों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। चंद लोगों को लाभ पहुंचाने के लिये एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है। किसानों की वर्तमान दशा पर कोई ध्यान नहीं है।
● उन्होंने बताया कि देश के 200 से अधिक किसान संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय के तहत किसानों की मांगों को व उनकी स्थिति को सुधारने के लिये मुद्दे छांटकर उन्हें लेकर संघर्ष छेड़ा है । उनकी मांग है कि किसानों को संपूर्ण कर्ज मुक्ति व फसल के डेढ गुना दाम दिया जाए।

● उन्होंने कहा कि वर्तमान मप्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कर्ज मुक्ति को लेकर कोई भी बात नहीं रखी है, जबकि कांग्रेस ने सिर्फ 2 लाख रूपये तक किसानों का कर्जा माफ करने की बात कही है।

● राजनीतिक हालात पर बोलते हुए मेधा पाटकर ने कहा कि भाजपा का तो घोषणा पत्र ही झूठ का पुलंदा नजर आता है, अभी गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंच से घोषणा की कि अब गुजरात के किसान को पानी की कमी नहीं आयेगी और सरकार बनते ही भाजपा के ही प्रदेश मुख्यमंत्री ने किसानों से पहली फसल ना करने की बात कही और बताया कि पानी की कमी है। भाजपा की यह सरकार किसानों का पानी 481 कम्पनियों को सरदार सरोवर से दे रही है। इससे यह स्पष्ट है कि यह सरकार किसान विरोधी है और चंद लोगों के लिये कार्य करती है।

● नर्मदा बचाओं आंदोलन की जनक मेघा पाटकर ने बताया कि चुनाव के उपरांत 29 व 30 नवम्बर को प्रदेश भर से संपूर्ण कर्ज मुक्ति, खेत उपज, दूध, मछली वनोपज की लागत का डेढ़ गुने दाम की मांग को लेकर विशाल आंदोलन होने जा रहा है जिसमें देश भर से लाखों किसान दिल्ली में पहुंचकर अपनी मांगे रखेंगे।

● मीडिया से चर्चा के दौरान मेघा पाटकर के साथ माकपा के अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज व मध्यप्रदेश किसान सभा के महासचिव अशोक तिवारी मौजूद रहे।

● इससे पहले मेघा पाटकर ने जौरा में विस्थापन विरोधी सम्मेलन में भी भाग लिया जिसमे गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता पूर्व विधायक महेशदत्त मिश्रा तथा अंचल के वरिष्ठ किसान नेता गयाराम सिंह धाकड़ सहित अनेक लोगो तथा बड़ी संख्या में भाग लिया ।

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मुरैना से सत्येंद्र तिवारी की रिपोर्ट 

 

 

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