प्रगतिशील चेतना के संवाहक संत कबीर पर विमर्श ःः 26 जून रायपुर ःः क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (कसम), विमर्श एवं पीस रायपुर

बोल के लब आज़ाद हैं तेरे
प्रगतिशील चेतना के संवाहक संत कबीर पर विमर्श

कबीर पंद्रहवीं शती के भक्ति काल के महानतम गीति कवि और रहस्यवादी थे | कबीर धार्मिक अर्थहीन रूढ़ियों और धर्माचार्यों पर प्रहार कर मानवता और तर्कशीलता के मार्ग पर आजीवन चलते रहे | उनकी रचनाओं ने न केवल हिंदी साहित्य पर बल्कि उत्तर भारत के जन सामान्य पर अमिट प्रभाव छोड़ा | आज के इस उन्मादी दौर में लोगों के बीच मानवमुक्ति, तर्कशीलता और अमन की सोच कायम करना बहुत जरुरी है | ऐसी परिस्थिति में लबों को आज़ाद करना वक्त की ज़रूरत है | बोल के लब आज़ाद हैं तेरे कार्यक्रम में हम उपरोक्त विषयों पर खुलकर बातें करेंगे | इस अवसर पर चुनिंदा जनगीत सुनने का भी अवसर मिलेगा |

दिन – 26 जून (मंगलवार) 2018
स्थान – वृंदावन हॉल, सिविल लाइन्स, रायपुर (छ.ग.)
समय – अपरान्ह 4:30 बजे
प्रमुख वक्ता – श्री महेन्द्रनाथ मिश्र (प्रख्यात चिंतक व लेखक)
जनगीत – कॉ. समर सेनगुप्ता (प्रख्यात नाटककार व जनगायक, विमर्श जबलपुर)

 

 क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (कसम), विमर्श एवं पीस रायपुर

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