नंद्कश्यप की तीन कवितायेँ

[दस्तक में प्रकाशित ]

मैं एक प्रतिबद्ध एक्टिविस्ट हूं,आप सभी को पढ़ता हूं कि बेहतर समाज निर्माण के लिए कुछ मिले, कविता, कहानी लिखना मेरे बस की बात नहीं, और व्यवस्था की भाषा में अराजक भी, इसलिए कोई कैरियर की गुंजाइश भी नहीं, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहता हूं
फिर भी कभी कभी कुछ घटनाएं दो चार लाइन लिखने बाध्य कर देतीं है, भ्रष्टाचार कविता सन 75 में तब जब हम जेल से निकले और फासिस्ट विरोधी सम्मेलन कामरेड राजेश्वर राव की उपस्थिति में हो रहा था और एक नेता कह रहे थे अब हम देश से भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर देंगे,बस साथियों से इस कविता के बोल कह दिया, और आज भी पूरी राजनीति इसी के इर्द-गिर्द हो रही,

नन्दकश्यप 
1
भ्रष्टाचार
लोग सदियों से मेरी
जड़ों की तलाश में
वादों पर वादे कर रहे
कि चीख चीख कर कहते
हम इसको जड़ से खत्म कर देंगे
बस हमें सत्ता दे दो
कितने नादां है लोग,
जो भरोसा कर वोट दे आते हैं
जिन्हें नहीं पता कि मैं
एक वृक्ष हूं बिना जड़ का
और पाता हूं खाद पानी सत्ता से

[2]
यह वह समय नहीं
हरेक के अपने दौर होते हैं
और वह किसी के लिए भयानक,
किसी के लिए बहुत कठिन भी होते हैं,
हरेक समय सत्ताधारी वर्ग का ही होता है
लेकिन इंसानियत हरेक समय के
केन्द्र में थी अब तक,
क्योंकि विचार तो इंसान ही करता है
भले ही उसके नाम पर
सत्ता अपनी दमन तंत्र चलाता हो
लेकिन समय भी तो भागता है ना
आज का समय सिर्फ सत्ताधारियों
का होकर रह गया है
उन्होंने मनुष्य को उपभोक्ता में
और विज्ञान, विचारों, समाज को
रिड्यूस कर दिया है टेक्नोलॉजी में
उसे भ्रमित कर दिया गया है
कि प्रकृति के कुछ नियम
शाश्वत होते हैं
बच्चे के पैदा होने से बड़े होने
तक का समय निर्धारित है,
परंतु
उन्होंने पूरे समाज पर गति (speed) का
ऐसा उन्माद पैदा कर दिया है,
कि वह तेज और तेज भाग रहा
एक भयावह दुर्घटना की ओर
और सत्ताधारी तैयारी में है
नए ग्रह की ओर जाने की

[3]

21जून और मेरा शहर
आज का दिन सबसे लंबा है
5-18मिनट से 6-47मिनट तक
लगभग साढ़े तेरह घंटे का ,
वैसे तो यह पूरे उत्तरी गोलार्ध में होगा
लेकिन मेरा शहर इस बार चर्चा में रहा,
इसलिए कि वह सबसे गर्म 49.3डिग्री
सेल्सियस था और सियासत दां हतप्रभ,
उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी करनी,
इतने जल्दी कहर बरपा जाएगी,
आखिर कहां होता है मेरा शहर
इस मौसम में
सूर्य का अंडाकार चक्कर लगाती
पृथ्वी और पृथ्वी रुपी अंडे की जर्दी के पास
मेरा शहर, एक तो
जर्दी की गर्मी तिस पर सीधे सूरज की तपिश
हां डाक्टर कहते हैं ,
मांस मछली अंडे के साथ,
हरी सब्जियां खाएं,
शरीर की ठंडक बनी
रहती है,
तो अंडे की जर्दी
के पास मेरे शहर को भी
हरे भरे जंगलों की जरूरत है,
लेकिन , सियासत ने विकास के
नाम पर बाक्साईट, कोयला चूना,
आदि के लिए जंगल काट दिए
और स्मार्ट शहर बसाने के लिए
अपने उम्र का शतक पार किए
हरे पेड़ों को काट दिया,
उन्हें पता था एक दिन
ये शहर भट्टी बन जाएगा,
लेकिन सियासतदां कोई
नई कहानी गढ़ते
उससे पहले ऐसा हो
जाएगा शायद नहीं सोचा था
इसीलिए आनन फानन में,
तापमापी के जांच की
घोषणा कर दी ,
और गर्म शहर की राजनीति
सबसे ठंडी हो गNew

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