अदानी को कोयला खदानों के खिलाफ सभी प्रभावित गाँव लामबंध ,अगर ग्रामसभा के प्रस्ताव को नही माना तो रायपुर पहुचेंगे हसदेव अरण्य के आदिवासी .

पर्यावरण दिवस की की घोषणा ,

 

5 जून 2017

विश्व पर्यावरण दिवस के दिन कोरबा के पतुरियादाड ग्राम में 20 गाँव की एक जनसभा का आयोजन छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन और हसदेव अरण्य बचाओ समिति ने किया ,जिसमे कहा गया की खदान से प्रभावित  20 ग्राम सभाओ ने प्रस्ताव पास किया था की किसी भी हालत में इन क्षेत्रो में में कोई खदान या अन्य कोई प्रोजेक्ट नहि लगाया जायेगा ,यह प्रस्ताव शाशन को सोम्प दिया गया था ,लेकिन कलेक्टर के प्रतिनिधि ने ग्रामीणों को  कहा की उनके ग्रामों को अदानी की खदान के लिया आवंटित कर दिया गया हैं .यह पूरी तरह पैसा कानून और वनाधिकार कानून का उलंघन है ,बिना वनाधिकार की कर्यवाही पूर्ण किया कोई आवंटन किया ही नहीं जा सकता .

20 गाँव के लोगो ने यह संकल्प दोहराया की किसी भी कीमत पर अपनी जमीन खदानों के लिया नहीं देंगे ,और यदि शाशन ने ग्राम सभा के प्रस्ताव को नही माना तो हम सभी आदिवासी राज्य स्तर पर बड़ा आन्दोलन करेंगे और तारीख तय करके रायपुर तक पैदल  जाकर आन्दोलन करेंगे .

पिछले साल इन्ही दिनो मदनपुर में आयोजित सम्मलेन में सभी ग्राम सभाओ ने भारत के प्रधान मंत्री को पत्र लिखा था की पर्यावरण बचाने की मुहिम में हमारा साथ दें .अभी तक प्रधान मंत्री का कोई जबाब तो नहीं आया ,लेकिन रतनपुर से अंबिकापुर तक फोर लाईन सड़क के बनाने के लिये करीब 2-5 लाख पेड़ काटने की प्रक्रिया जरुर शुरू हो गई .

पर्यावरण दिवस के दिन आयोजित समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री  अरविन्द नेताम .छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन से नन्द कश्यप , आनंद मिश्र ,विजय भाई , पीयूसीएल से डा, लाखन सिंह ,प्रियंका शुक्ला ,दलित आदिवासी मंच से राजिम केवास , देवेन्द्र और रेला कला मंच के कलाकार ,छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदुर कार्यकर्त्ता समिति के कलादास डेहरिया आदि ने संघर्ष को समर्थन दिया ,

नन्द कश्यप ने हाल ही में हुए पेरिस समेलन का हवाला देते हुए कहा की पर्यावरण को लेकर भारत के प्रधान मंत्री के  बयान  उल्लेख किया जिसमें उन्होंने धरती के बढ़ते तापमान को कम करने के लिये हमें प्राकृतिक जीवन शैली को प्रोत्साहन करेंगे ,हसदेव अरण्य के आदिवासी उसी जीवन शोली में जी रहे है फिर उन्हें उजाड़ कर खनन कंपनियों को क्यों दिय जा रहा हैं .

अरविन्द नेताम ने कहा की अदानी और रमन सिंह की सरकार का गठजोड़ के खिलाफ यह लड़ाई आसन नहीं हैं ,लेकिन हमारे पास संविधान और कानून का आधार हैं ,आप इसी आधार पर अपनी इज्जत और अपनी पहचान और अपने समाज के लिये लड़ रहे हैं ,आने वाले दिन आपके लिये और भी खतनाक होंगे क्यों कि सरकारे आपको ख़तम करके विकास करना चाहती हैं .

आनंद मिश्र ने कहा की यह  लड़ाई सिर्फ अपनी जमीन बचने के लिया नहीं बल्कि सम्पूर्ण हसदेव  अरण्य को बचाने के लिय हैं और हसदेव अरण्य बचाने का मतलब छत्तीसगढ़ सहित पुरे देश की जलवायु व मानसून को बचाने की लड़ाई है .हम जरुर जितेंम्गे हमें सतर्क रहना होगा ,हमें एकजुट रहना होगा और किसी प्रलोभन में आकर दलाली करने वालो को पहचान करके उन्हें अलग  थलग करना होगा

 

हसदेव अरण्य संघर्ष समिति के अध्यक्ष उमेश्वर सिंह ने सम्मलेन के प्रारंभ में कहा की फर्जी पर्यावरण दिवस मनाने वालो ले बरक्स हसदेव अरण्य बचाने के लिया आज लोग एकजुट हुए हैं , छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने एतिहासिक प्रष्ठभूमि के साथ हसदेव अरण्य समिति के गठन व उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए आज की चुनोतियो पर विस्तार से अपनियो बात राखी .

रेला के कलाकारों ने संघर्ष गीत और नाटक के माध्यम से अपनी बात रखी .

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